क्या है तबादले का गणित? 128 अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर प्रदेश में गरमाई सियासत

क्या है तबादले का गणित?! Politics heats up in the state regarding the transfer of 128 officers

Edited By: , September 13, 2021 / 11:34 PM IST

रायपुर: राज्य सरकार ने रविवार देर रात 128 अधिकारियों के ट्रांसफर किए, इसमें 21 सीनियर IAS, 11 पुलिस अधिकारी और 96 राज्य प्रशासनिक सेवा स्तर के अधिकारी शामिल है। वैसे तो राज्य सरकार अपने वक्त और जरूरत के हिसाब से अधिकारियों का तबादला करती रहती है। लेकिन पहली बार इतने बड़े पैमाने पर फेरबदल हुए हैं, जिसे लेकर सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस जहां इस तबादले को राज्य सरकार की रूटिन प्रक्रिया बता रही है, तो वहीं बीजपी ने राज्य सरकार का तबादला उद्योग करार दिया।

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राज्य सरकारें वक्त और जरुरतों के हिसाब से प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला समय-समय पर करती रहती है। इससे पहले जून माह में ही राज्य सरकार ने 15 से ज्यादा जिलों के कलेक्टर समेत 30 से ज्यादा IAS अधिकारियों का तबादले किए। लेकिन जिस तरह से रविवार देर रात 128 अधिकारियों की ट्रांसफर सूची निकली, उससे ये साफ हो गया कि इसकी तैयारी लंबे समय से की जा रही थी। गोधन न्याय योजना की जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह और जल जीवन मिशन की जिम्मेदारी सीएम के एसीएस सुब्रत साहू को सौंपी गई है। इसी तरह रायपुर एसपी रहें अजय यादव का एक हफ्ते के अंदर दो बार तबादला हुआ है, उन्हें उप पुलिस महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय से सरगुजा रेंज का आईजी बनाया गया है। इसके अलावा राज्य प्रशासनिक सेवा स्तर के 96 अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं। राज्य में पहली बार इतनी बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हुई है, लेकिन अब ये मुद्दा प्रशासनिक के साथ साथ राजनीतिक भी हो चुका है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस का ट्रांसफर उद्योग करार दिया है।

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इधऱ,कांग्रेस ने बीजेपी नेताओँ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए तबादलों को रूटीन प्रक्रिया बताया। साथ ही पलटवार किया कि बीजेपी ने अपने 15 साल में केवल तबादला उद्योग चलाया। इसलिए उनकी ऐसी सोच है।

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सत्ता पक्ष को अपना परफोर्मेंस जमीन पर दिखाने के लिए अधिकारियों की अपने मुताबिक जमावट जरूरी है। वैसे इन थोकबंद ट्रांसफर को रूटीन बताने के लिए कई कारण हो सकते हैं। मसलन प्रशासनिक स्तर पर महीनों से अफसरों का जमे होना। वरिष्ठ राज्य सेवा अधिकारियों के अनुभवों का लाभ कुछ खास जगहों पर लेना। बहरहाल, आगामी निकाय चुनाव से पहले अगर सरकार प्रसाशनिक कसावट के नाम पर अफसरों की जमावट बदलती है तो इसमें हैरत नहीं होनी चाहिए। क्योंकि,भाजपा भी सत्ता में रहते ये कई दफा कर चुकी है।

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