Leader of Opposition Controversy: नेता प्रतिपक्ष विवाद के बीच कांग्रेस पार्षदों की चिट्ठी आई सामने, दीपक बैज को लेटर लिखकर कह दी ये बड़ी बात

नेता प्रतिपक्ष विवाद के बीच कांग्रेस पार्षदों की चिट्ठी आई सामने...Leader of Opposition Controversy: Letter of Congress councilors came out

  • Reported By: Rajesh Mishra

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  • Publish Date - May 8, 2025 / 02:34 PM IST,
    Updated On - May 8, 2025 / 02:34 PM IST

Leader of Opposition Controversy | Image Source | IBC24

HIGHLIGHTS
  • रायपुर- कांग्रेस के पांच पार्षदों की चिट्ठी सामने आई ,
  • पार्षदों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को लिखी चिट्ठी ,
  • इस्तीफा वापस लेने, पार्टी के फैसलों को मानने की बात कही ,

रायपुर: Leader of Opposition Controversy: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नेता प्रतिपक्ष को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस को बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। कांग्रेस के पांच पार्षदों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को एक चिट्ठी लिखकर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई है और विवाद को शांत करने का संकेत दिया है।

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Leader of Opposition Controversy: चिट्ठी में पार्षदों ने यह स्पष्ट किया है कि वे पार्टी के फैसलों को मानने के लिए तैयार हैं और पहले दिए गए इस्तीफे को वापस लेने की इच्छा जताई है। साथ ही उन्होंने पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज के साथ हुई बातचीत को सकारात्मक बताया और संतोष जताया कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना।

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क्या कहा गया है चिट्ठी में?

Leader of Opposition Controversy:r: चिट्ठी में पार्षदों ने लिखा की हम कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं। हमारी नाराजगी संगठन से नहीं कुछ स्थानीय परिस्थितियों को लेकर थी। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज जी ने हमारी बात सुनी और हमें भरोसा दिलाया। हम पार्टी के फैसलों का सम्मान करते हैं और संगठन के साथ खड़े हैं।

"कांग्रेस पार्षद इस्तीफा" किस वजह से दिया गया था?

"कांग्रेस पार्षद इस्तीफा" कुछ स्थानीय मुद्दों और असहमति के कारण दिया गया था, संगठन से उनकी कोई नाराजगी नहीं थी।

क्या "कांग्रेस पार्षद इस्तीफा" वापस ले लिया गया है?

हां, पांचों पार्षदों ने पत्र लिखकर अपने "कांग्रेस पार्षद इस्तीफा" को वापस लेने की इच्छा जताई है।

"दीपक बैज" की क्या भूमिका रही इस विवाद में?

"दीपक बैज" ने सभी पार्षदों से बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और संगठन की ओर से विश्वास दिलाया, जिससे स्थिति शांत हुई।

क्या अब "कांग्रेस पार्षद" पार्टी के साथ हैं?

जी हां, पार्षदों ने स्पष्ट कहा है कि वे पार्टी के निर्णयों का सम्मान करते हैं और संगठन के साथ खड़े हैं।

"कांग्रेस पार्षद विवाद" का आगे क्या असर हो सकता है?

अब जबकि विवाद शांत हो गया है, इससे पार्टी को संगठनात्मक मजबूती और एकता का संकेत मिला है।