Van Dhan Vikas Kendra Jashpur : जंगल के उत्पादों ने बदली किस्मत! खेती छोड़ उद्यमी बने ग्रामीण, संजीवनी केंद्रों पर मची इन हर्बल दवाओं की धूम

जशपुर के वन धन विकास केंद्र से जुड़े आदिवासी स्व-सहायता समूह औषधीय उत्पाद बनाकर लाखों की आय अर्जित कर रहे हैं। इस पहल ने ग्रामीण उद्यमिता और जनजातीय सशक्तिकरण का नया मॉडल पेश किया है।

Van Dhan Vikas Kendra Jashpur : जंगल के उत्पादों ने बदली किस्मत! खेती छोड़ उद्यमी बने ग्रामीण,  संजीवनी केंद्रों पर मची इन हर्बल दवाओं की धूम

Van Dhan Vikas Kendra Jashpur / Image Source : SOCIAL MEDIA

Modified Date: April 8, 2026 / 06:33 pm IST
Published Date: April 8, 2026 6:33 pm IST
HIGHLIGHTS
  • जशपुर के पंचक्की वन धन विकास केंद्र से जुड़े समूह जड़ी-बूटियों से औषधीय उत्पाद बना रहे हैं।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 में 23.16 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की गई।
  • ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड और ‘संजीवनी’ आउटलेट्स से उत्पादों की बिक्री हो रही है।

रायपुर : वन धन विकास केंद्र आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए में शुरू की गई एक अनूठी पहल है। ये केंद्र स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को जोड़कर, लघु वन उत्पादों (MFP) के मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से आदिवासियों की आय और आजीविका को बढ़ाते हैं। ये समूह जंगलों में मिलने वाली औषधीय जड़ी-बूटियों से च्यवनप्राश, वासावलेह, कौंचपाक और आरोग्य अमृत जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिससे उन्हें स्थायी रोजगार मिल रहा है।

जशपुर जिले के पंचक्की स्थित वन धन विकास केंद्र (VDVK) के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूह ग्रामीण उद्यमिता और जनजातीय सशक्तिकरण का अच्छा उदाहरण बनकर सामने आए हैं। इस पहल से उरांव जनजाति के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। पहले ये लोग मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर निर्भर थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री जनजातीय वन धन विकास योजना (PMJVM) के तहत छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ (CGMFED) और ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से सफल उद्यमी बन गए हैं।


वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन समूहों ने 23.16 लाख रूपए की वार्षिक बिक्री दर्ज की है, जबकि पिछले पाँच वर्षों में औसत वार्षिक बिक्री 31.9 लाख रूपए रही है। यह उनकी लगातार मेहनत और उत्पादों की गुणवत्ता का परिणाम है। इस सफलता में प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। CGMFED द्वारा समूहों को उत्पाद की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन, मशीनरी और विपणन में भी सहायता प्रदान की गई।समूहों ने ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत अपनी पहचान बनाई है और ‘संजीवनी’ आउटलेट्स के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। इसके अलावा, आयुष विभाग से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त कर उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित की गई है। इस पहल से समूह के सदस्यों की आय बढ़ी है और उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

अब वे अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं। बेहतर कार्य के लिए समूहों को सम्मान भी मिला है, जिससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ी है। वन धन विकास केंद्र पंचक्की की यह सफलता दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण, सहयोग और सामूहिक प्रयास से जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

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लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and storyteller committed to ethical, ground-level, and impact-oriented reporting. A Gold Medalist in Journalism & Mass Communication, I believe in telling stories with accuracy, sensitivity, and purpose. Currently working with IBC24, I specialize in content writing, news production, and modern storytelling bridging facts with human experiences to inform, engage, and inspire audiences..