Sakti Murder Case: सरकारी योजना के पैसों के लिए खूनी खेल, भाई ने भाई को टांगी से उतारा मौत के घाट, कोर्ट ने सुनाई कड़ी सजा
Sakti Murder Case: जिले में आवास योजना की राशि के बंटवारे को लेकर छोटे भाई की टांगी मारकर हत्या करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास की सजा।
Sakti Murder Case/AI Generated Image
- प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि को लेकर दो भाइयों में हुआ था विवाद
- 12 वर्षीय बेटे की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध
- अदालत ने आरोपी धनीराम शिकारी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
Sakti Murder Case: सक्ती जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि के बंटवारे को लेकर छोटे भाई की टांगी मारकर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे ने 5 जून 2026 को आरोपी धनीराम शिकारी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को अतिरिक्त 6 माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
टांगी से सिर पर किया वार
Sakti Murder Case अभियोजन के अनुसार, 25 जून 2025 की सुबह ग्राम अकलसरा निवासी मनोहर दास महंत को गांव के मनीराम शिकारी की हत्या की जानकारी मिली। जब वह मृतक के घर पहुंचे तो मनीराम का शव घर में पड़ा मिला। उसके सिर में गंभीर चोट के निशान दिखाई थे। इसके बाद मनोहर दास ने मृतक के 12 वर्षीय पुत्र राजू शिकारी से घटना के बारे में पूछा। राजू ने बताया कि 24 जून 2025 की रात करीब 8 बजे उसके पिता मनीराम शिकारी और बड़े पिता धनीराम शिकारी के बीच विवाद हो रहा था। विवाद इतना बढ़ गया कि धनीराम ने घर के सामने स्थित इमली के पेड़ के नीचे टांगी से मनीराम के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
Sakti Murder Case घटना की जानकारी गांव के सरपंच पुरुषोत्तम नायक, पंच नील सिंह सिदार और गुरबार सिंह चंद्रा को भी दी गई थी। मामले में मृतक की पत्नी मंटोराबाई शिकारी ने भी महत्वपूर्ण गवाही दी। उसने बताया कि उसकी पहली शादी परसापाली निवासी पितरलाल शिकारी से हुई थी, लेकिन पति दूसरी पत्नी ले आया था। इसके बाद करीब तीन वर्षों से वह मनीराम शिकारी के साथ पत्नी के रूप में रह रही थी। घटना की रात वह, मनीराम और राजू शिकारी घर पर मौजूद थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए। प्रत्यक्षदर्शी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, मृतक की पत्नी और पुत्र के बयानों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जब्त हथियार, एफएसएल रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया।
आजीवन कारावास की सजा
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सक्ती ने अपने निर्णय में माना कि आरोपी धनीराम शिकारी ने अपने सगे भाई मनीराम शिकारी की हत्या (Sakti Murder Case) की थी। इसके आधार पर न्यायालय ने उसे धारा 103(1) बीएनएस के तहत दोषसिद्ध कर आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक उदय कुमार वर्मा ने पैरवी की।
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