लोकतंत्र के प्रहरियों के बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री

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लोकतंत्र के प्रहरियों के बलिदानों को कभी नहीं भूलना चाहिए: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री

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  • Publish Date - June 28, 2026 / 10:01 PM IST,
    Updated On - June 28, 2026 / 10:01 PM IST

रायपुर, 28 जून (भाषा) मुख्यमंत्री ने रविवार को आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कहा कि ‘लोकतंत्र के प्रहरियों’ के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए।

वह ‘आपातकाल के योद्धा’ स्मारिका के विमोचन के बाद आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आपातकाल विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ हमेशा से संघर्ष, संस्कृति और परंपरा की भूमि रहा है तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल जैसे विषय को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करना सराहनीय पहल है, जिससे आने वाली पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराया जा सकेगा।

पच्चीस जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक भारत में संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू रहा। वर्ष 2025 से केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मना रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके चाचा स्वर्गीय नरहरी साय आपातकाल के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे।

उन्होंने कहा कि उस समय स्वयंसेवक प्रभावित परिवारों तक गुप्त रूप से भोजन पहुंचाया करते थे।

उन्होंने कहा कि आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय है और लोकतंत्र सेनानियों के बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।

उन्होंने कहा, ‘यह भारतीय लोकतंत्र की परीक्षा का दौर था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर आघात पहुंचा था। जेल और कठिनाइयों का सामना करने वाले लोकतंत्र सेनानियों के बलिदान से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा लेनी चाहिए।’

उन्होंने युवाओं से एकता, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का आह्वान करते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि भारत के सांस्कृतिक मूल्यों ने समाज को मजबूत किया है और वे देश की वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ कर सकते हैं।

विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था और यह लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति सतर्क रहने की याद दिलाता है।

सरकारी अधिकारी के अनुसार, राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।

स्कूल वर्ग में रायपुर के जे.आर. दानी गर्ल्स स्कूल की जागृति जांगड़े ने प्रथम स्थान हासिल किया और उन्हें 31,000 रुपये तथा स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। दूसरे स्थान पर कोरबा के विवेकानंद विद्यापीठ स्कूल के सूरज टंडिया और तीसरे स्थान पर दुर्ग के अग्रसेन इंटरनेशनल स्कूल के अंश देशमुख रहे।

कॉलेज वर्ग में रायपुर की कल्याणी पाटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साहू द्वितीय और दुर्ग की खुशबू तृतीय रहीं।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा भी मौजूद थीं।

भाषा

राखी नरेश

नरेश