बिलासपुर/अंबिकापुर, 29 अगस्त (भाषा) नेपाल में आई भीषण बाढ़ में लापता भारतीय मूल की चिकित्सक प्रियंका चौधरी (39) के पिता रमेश चौधरी (63) अपनी बेटी के संबंध में अच्छी खबर की उम्मीद कर रहे हैं।
प्रियंका, कैलास मानसरोवर की यात्रा से लौटने के बाद बिलासपुर में अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाने वाली थीं।
मूल रूप से बिलासपुर की रहने वालीं प्रियंका चौधरी फिनलैंड में चिकित्सक हैं और छत्तीसगढ़ की उन दो अनिवासी भारतीय (एनआरआई) महिलाओं में शामिल हैं जिनके नेपाल में 25 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के बाद लापता होने की खबर है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रियंका और सरगुजा की रहने वाली ब्रिटिश नागरिक डॉक्टर मीना गुप्ता, ईशा फाउंडेशन से जुड़े लगभग 77 तीर्थयात्रियों के उस समूह का हिस्सा थीं, जो कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
उन्होंने बताया कि समूह तीर्थयात्रा पूरी करने के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा पार करने की औपचारिकताओं के लिए 25 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी आव्रजन केंद्र पहुंचा था, तभी अचानक बाढ़ आ गई।
चौधरी परिवार के लिए, प्रियंका के साथ हुई आखिरी बातचीत एक बेहद दर्दनाक याद बन गई है।
चौधरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘उनकी (प्रियंका चौधरी) मां ने 25 अगस्त को सुबह करीब नौ बजे प्रियंका से बात की थी। उसने बताया कि वह आव्रजन केंद्र पर हैं और बाद में बात करेंगी। सुबह करीब 9.14 बजे यह हादसा हुआ। हमें इसके बारे में पता नहीं था, हम उनका फोन आने का इंतजार करते रहे, लेकिन बाद में मीडिया में आई खबरों ने हमें चौंका दिया। हमने उन्हें फोन करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।’
उससे पिछली रात, परिवार ने प्रियंका से लगभग एक घंटे तक बात की थी। उन्होंने बड़े उत्साह के साथ कैलास मानसरोवर यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा था कि वह 25 अगस्त को काठमांडू पहुंच जाएंगी।
उनके पिता ने बताया कि उन्हें 26 अगस्त को दिल्ली की यात्रा करनी थी और फिर रक्षाबंधन के लिए बिलासपुर पहुंचना था।
उन्होंने बताया कि प्रियंका ने उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन जाने से पहले छत्तीसगढ़ में ही अपनी स्कूली शिक्षा और बीडीएस की पढ़ाई पूरी की थी और बाद में उन्होंने फिनलैंड में पीएचडी की, वहां के एक व्यक्ति से शादी की और वहीं बस गईं।
उन्होंने बताया कि वह वहां एक विश्वविद्यालय में शिक्षिका के तौर पर काम करने लगीं।
परिवार उनके पति के संपर्क में है और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कार्यालय से भी संपर्क किया है, साथ ही अधिकारियों द्वारा मांगे गए दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं।
चौधरी ने कहा, ‘उन्होंने हमें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।’
घर पर प्रियंका के इंतजार ने परिवार को भावनात्मक रूप से तोड़ दिया है।
चौधरी ने कहा, ‘मेरी पत्नी अवसाद में हैं और रोती रहती हैं। मेरा बेटा तरुण (प्रियंका का छोटा भाई) लगातार कई जगह फोन कर रहा है और उसके बारे में कोई जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। रोहतक (हरियाणा) से रिश्तेदार भी यहां आए हैं।’
चौधरी ने आंखों में आंसू लिए कहा, ‘और अब, सब कुछ भगवान के हाथ में है। हम किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे हैं।’
यहां से लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर दूर अंबिकापुर में एक और परिवार इसी तरह के इंतजार के दौर से गुजर रहा है।
सरगुजा की रहने वालीं और ब्रिटिश नागरिक डॉक्टर मीना गुप्ता भी रक्षाबंधन (शुक्रवार को मनाया गया) के मौके पर दिल्ली में अपने परिवार से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं, लेकिन नेपाल में उनके लापता होने के बाद त्योहार की सारी योजनाएं धरी की धरी रह गईं।
उनके पिता करताराम गुप्ता (जो अभी दिल्ली में हैं) ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मेरी बेटी चाहती थी कि मैं काठमांडू पहुंचने के बाद उसके साथ दिल्ली लौटूं। लेकिन मैंने भूस्खलन और बारिश के मौसम का हवाला देते हुए मना कर दिया था। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बेटी को इसके कहर का सामना करना पड़ेगा।’
गुप्ता ने बताया कि परिवार ने रक्षाबंधन के लिए दिल्ली में इकट्ठा होने की योजना बनाई थी।
उन्होंने कहा, ‘मेरी चार बेटियां और एक बेटा है। मेरा बेटा भोपाल में रहता है। परिवार के सभी सदस्यों ने दिल्ली में मिलकर रक्षाबंधन मनाने की योजना बनाई थी।’
मीना 14 अगस्त को दिल्ली पहुंची थीं और वह ईशा फाउंडेशन के उस समूह का भी हिस्सा थीं जो कैलास मानसरोवर यात्रा पर जाने से पहले काठमांडू गया था।
उन्होंने बताया कि समूह ने 23 अगस्त को तीर्थयात्रा पूरी कर ली थी और नेपाल-तिब्बत सीमा पार करने की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 25 अगस्त को रसुवागढ़ी आव्रजन कार्यालय पहुंचा था, तभी यह आपदा आ गई।
उनके पिता ने बताया कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अंबिकापुर के होली क्रॉस स्कूल से पूरी की और चिकित्सक बनने के बाद वह इंग्लैंड चली गईं। उन्होंने बताया कि त्वचा रोग विशेषज्ञ मीना पिछले 15 वर्षों से ब्रिटेन में रह रही थीं और उनकी तीन बेटियां हैं।
शुक्रवार को राज्य सरकार ने बताया कि छत्तीसगढ़ से जुड़े नौ लोगों का पता चल गया है।
जिन दो लोगों के लापता होने की खबर थी, उन्होंने अपने परिवारों से संपर्क कर लिया है, जबकि रायपुर के पांच निवासियों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है और वे वापसी की यात्रा शुरू कर चुके हैं।
सरकार ने बताया कि दो एनआरआई (बिलासपुर की चिकित्सक प्रियंका चौधरी और सरगुजा की चिकित्सक मीना गुप्ता) का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
भाषा सं संजीव
संतोष शुभम
संतोष