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Chhattisgarh HC On Compassionate Appointment: क्या शादी के बाद भी बेटी को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आया हैरान कर देने वाला फैसला, जानिए
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Chhattisgarh HC On Compassionate Appointment: क्या शादी के बाद भी बेटी को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आया हैरान कर देने वाला फैसला, जानिए
Publish Date - August 26, 2026 / 01:48 PM IST,
Updated On - August 26, 2026 / 01:49 PM IST
Chhattisgarh HC On Compassionate Appointment: क्या शादी के बाद भी बेटी को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आया हैरान कर देने वाला फैसला, जानिए /image: IBC24 File
HIGHLIGHTS
बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले और बैंक के आवेदन खारिज कर दिया
बैंक को 90 दिनों के भीतर अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया है
बिलासपुर। Chhattisgarh HC On Compassionate Appointment:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में फैसला दिया है कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को निरस्त करते हुए दो शादीशुदा बेटियों (Married Daughter Compassionate Job) को बैंक में अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।
जानें क्या है पूरा मामला ( Married Daughter Job Rights)
Chhattisgarh HC On Compassionate Appointmentकोर्ट ने बैंक को यह भी निर्देशित किया कि दोनों अपीलकर्ताओं की शैक्षणिक योग्यता और लागू नियमों के अनुसार 90 दिन के भीतर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बेटी के विवाहित होने को नियुक्ति में अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक (Chhattisgarh Gramin Bank) के 2 कर्मचारियों मदन कुमार पांडा और शैलेन्द्र कुमार जॉन्सन की नौकरी के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी शादीशुदा बेटियों अंकिता मिश्रा और शीना डेविड ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंक ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सिंगल बेंच ने 7 मई 2026 को उनकी याचिकाएं खारिज कर दी। इसके खिलाफ रिट अपील दायर की गई।
कोर्ट ने बैंक के रिजेक्शन आदेशों को किया रद्द (CG High Court Order)
Compassionate Appointment Rules डिवीजन बेंच ने कहा कि बैंक ने सिर्फ बेटियों के विवाहित होने को आधार बनाकर उन्हें नौकरी से बाहर किया, जबकि इसी योजना के तहत विवाहित बेटों को नियुक्ति का लाभ दिया गया। यह समानता के अधिकार के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी माना कि शादी होने मात्र से किसी बेटी की अपने माता-पिता पर आर्थिक या सामाजिक निर्भरता खत्म नहीं मानी जा सकती। निर्भरता का वास्तविक आकलन किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने बैंक के रिजेक्शन आदेशों के साथ सिंगल बेंच का फैसला रद्द कर दिया।
क्या शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि केवल बेटी के विवाहित होने को अनुकंपा नियुक्ति के लिए अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता। हालांकि नियुक्ति संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार होगी।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किस मामले में फैसला सुनाया?
यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के दो दिवंगत कर्मचारियों की विवाहित बेटियों के अनुकंपा नियुक्ति आवेदन से जुड़ा था, जिन्हें बैंक ने पहले खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने बैंक को कितना समय दिया है?
कोर्ट ने बैंक को दोनों अपीलकर्ताओं की शैक्षणिक योग्यता और लागू नियमों के अनुसार 90 दिनों के भीतर अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले पर क्या कहा?
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के 7 मई 2026 के फैसले को निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने विवाहित बेटियों के अधिकारों को लेकर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने कहा कि विवाह मात्र से बेटी की माता-पिता पर आर्थिक या सामाजिक निर्भरता स्वतः समाप्त नहीं मानी जा सकती। वास्तविक परिस्थितियों और निर्भरता का आकलन किया जाना जरूरी है।