Vishnu Ka Sushasan: रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ वासियों के चेहरे पर खुशहाली की झलक, साय सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति से आ रहा सामाजिक-आर्थिक बदलाव

रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ वासियों के चेहरे पर खुशहाली की झलक, Vishnu Ka Sushasan: glimpse of prosperity on faces of Chhattisgarh residents in silver jubilee year

Vishnu Ka Sushasan: रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ वासियों के चेहरे पर खुशहाली की झलक, साय सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ति से आ रहा सामाजिक-आर्थिक बदलाव
Modified Date: August 26, 2025 / 12:09 am IST
Published Date: August 25, 2025 10:32 pm IST

रायपुरः Vishnu Ka Sushasan छत्तीसगढ़ राज्य इस वर्ष 2025 में अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। एक राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद छत्तीसगढ़ में अपनी सतत विकास यात्रा शुरू की। इस विकास यात्रा के दौरान कई चुनौतियां भी आईं। राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद अब तेजी के साथ सामाजिक आर्थिक विकास हो रहा है। राज्य में डबल इंजन की सरकार काम कर रही है और लोगों के चेहरे पर समृद्धि और खुशहाली की झलक भी नजर आने लगी है। सरकार ने सामाजिक आर्थिक विकास के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लोक कल्याण की ऐसी योजनाएं तैयार की हैं, जिनके प्रभाव से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ देश के विकसित राज्यों में से एक होगा। पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने अनेक चुनौतियों के बावजूद सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य ने औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में संतुलित विकास करते हुए देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आगामी वर्षों में छत्तीसगढ़ को हरित विकास, डिजिटल नवाचार और सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता देते हुए और भी ऊंचाइयों तक पहुंचने की जरूरत है। यदि यही गति और समर्पण बना रहा, तो छत्तीसगढ़ “समृद्ध छत्तीसगढ़” की अवधारणा को साकार करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुनिश्चित करेगा।

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25 वर्षों की विकास यात्रा

Vishnu Ka Sushasan छत्तीसगढ़ राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था, जब यह मध्यप्रदेश से अलग होकर एक नया राज्य बना। जनजातीय बहुल यह प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों, खनिजों, सांस्कृतिक विविधता और कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है। अपने गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने विकास की एक लंबी और प्रेरणादायक यात्रा तय की है। यह यात्रा राज्य की आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में किए गए प्रयासों का सजीव प्रमाण है।

आर्थिक क्षेत्र में प्रगति

छत्तीसगढ़ ने बीते दो दशकों में आर्थिक मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। खनिज संसाधनों से समृद्ध यह राज्य देश की इस्पात, कोयला और बिजली उत्पादन में अग्रणी है। औद्योगिक विकास के क्षेत्र में विशेष रूप से भिलाई, कोरबा, रायगढ़ और जगदलपुर जैसे शहरों में तेजी से प्रगति हुई है। राज्य सरकार की औद्योगिक नीति ने निवेशकों को आकर्षित किया है और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। राज्य के बजट का आकार कई गुना बड़ा है जिससे अधोसंरचना और सामाजिक विकास में प्रगति आई है।

कृषि और ग्रामीण विकास

छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है। कृषि इस राज्य की रीढ़ है और किसानों की स्थिति सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं। बकाया धान बोनस भुगतान, पीएम किसान सम्मान निधि, ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी, सौर सुजला योजना जैसी योजनाएं किसानों को समृद्धि की ओर ले जा रही हैं। इन योजनाओं से किसानों को सीधा लाभ पहुंचा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। जल-संसाधनों के बेहतर उपयोग और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है।

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शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

राज्य सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। विद्यालयों के अधोसंरचना में सुधार, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, पीएम श्री विद्यालय, छात्रवृत्ति योजनाएं और “शालाओं का युक्तियुक्तकरण” जैसे कदमों से शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है। स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में मजबूती आई है और शहरों से लेकर गांवों तक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ है। नए मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केद्रों की स्थापना से सुदूर इलाकों तक लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुनिश्चित हुई है।

सामाजिक और सांस्कृतिक विकास

छत्तीसगढ़ ने अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, नृत्य, संगीत, त्योहारों और जनजातीय परंपराओं को संरक्षित और प्रचारित करने का कार्य किया है। तीज-त्यौहार, जैसे हरेली, छेरछेरा, तीजा पोरा, करमा राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान स्थानीय महोत्सव और लोकपर्वों के आयोजन में सरकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार के प्रयासों से बस्तर दशहरा जैसे लोक उत्सव को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

सामाजिक सशक्तिकरण

राज्य में महिला सशक्तिकरण, आदिवासी कल्याण, तथा बाल विकास के क्षेत्र में अनेक योजनाएं शुरू की गईं। महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए महतारी वंदन योजना चलाई जा रही है। इसके अलावा आत्मनिर्भरता के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत विभिन्न रोजगार मूलक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। श्रमिक परिवार के मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजना चलाई जा रही है। सखी वन स्टॉप सेंटर, सुपोषण अभियान, बिजली बिल हाफ योजना से समाज के सशक्तिकरण का रास्ता प्रशस्त हो रहा है।

सड़क और बुनियादी ढांचे का विकास

छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल लगातार विस्तृत हो रहा है। गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राज्य सरकार की योजनाएं प्रभावी साबित हुई हैं। रेलवे, हवाई सेवा और नगरीय ढांचे में सुधार ने कनेक्टिविटी को नया आयाम दिया है। रायपुर का नया रेल कॉरिडोर, रायपुर- विशाखापट्टनम नई सड़क परियोजना, जगदलपुर हवाई सेवा और बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजना इसके उदाहरण हैं।

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सामाजिक- आर्थिक बदलाव लाने वाली योजनाएं

  • तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक वृद्धि: तेंदूपत्ता संग्राहकों का संग्रहण पारिश्रमिक ₹4,500 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति मानक बोरा
  • महतारी वंदन योजना: माताओं- बहनों को प्रतिमाह ₹1000 की आर्थिक सहायता
  • नियद नेल्ला नार योजना: बस्तर के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के कैंपों के समीप स्थापित 324 गांवों में तीव्र सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए समन्वित योजना कार्यक्रम
  • चरण पादुका योजना: तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका का वितरण
  • बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण: आदिवासी बाहुल्य बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में समन्वित विकास के लिए स्थापित विशेष प्राधिकरण
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: किसानों पर फसल उत्पादन के लागत मूल्य का बोझ कम करने के लिए आदान सहायता
  • सौर सुजला योजना: अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप की सहायता
  • नक्सल उन्मूलन कार्यक्रम: इस तीव्र अभियान के तहत पिछले डेढ़ वर्ष के अंदर 435 से अधिक नक्सलियों को किया न्यूट्रलाइज, 1450 से अधिक ने किया आत्म समर्पण

2025 में आया ये अंतर

क्षेत्र सन् 2000 सन् 2025
स्वास्थ्य – स्वास्थ्य सूचकांक: 0.585
– शिशु मृत्यु दर: 67/1000
– कुल प्रजनन दर: लगभग 3.0
– ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा कमजोर
– स्वास्थ्य सूचकांक: 0.672
– शिशु मृत्यु दर: 38/1000
– नक्सली इलाकों में PHC/CHC की शुरुआत
उद्योग – औद्योगिक योगदान: ~30%
– खनन और इस्पात आधारित उद्योग प्रमुख
– बड़े निवेश और औद्योगिक क्षेत्र सीमित
– औद्योगिक योगदान: 42.4%
– इस्पात, सीमेंट, बिजली उत्पादन में अग्रणी राज्य
– बड़े निवेश क्षेत्र और औद्योगिक पार्क स्थापित
रोजगार – बेरोजगारी दर: ~6%
– महिला श्रम भागीदारी: 30%
– स्वरोजगार योजनाएं सीमित
– कृषि और पारंपरिक कामों पर निर्भरता
– बेरोजगारी दर: 2.4%
– महिला श्रम भागीदारी: 59.8%
– महिला समूह योजनाओं से रोजगार
– उद्योग, आईटी, पर्यटन, सेवा, स्वरोजगार में अवसर
कृषि – सिंचाई क्षमता: 13.28 लाख हेक्टेयर
– वर्षा पर निर्भरता अधिक
– तकनीक और समर्थन नीति की कमी
– पारंपरिक खेती उपकरण
– सिंचाई क्षमता: 21.76 लाख हेक्टेयर
– आधुनिक तकनीक व खरीदी केंद्र
– धान उत्पादन में अग्रणी
– वार्षिक कृषि वृद्धि दर: 7.8%
शिक्षा – शिक्षा सूचकांक: 0.249
– प्राथमिक विद्यालयों की संख्या सीमित, ग्रामीण क्षेत्रों में कमी
– महिला साक्षरता 50% से कम
– उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या कम
– शिक्षा सूचकांक: 0.520
– 32,461 प्राथमिक स्कूल
– महिला साक्षरता 70%+
– 15 शासकीय और 18 निजी विश्वविद्यालय, 11 मेडिकल कॉलेज


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।