भोपालः कोरोना संकट के बीच मध्यप्रदेश में लगातार रोजमर्रा की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं। बाजार के भाव पर छोड़ दिए गए पेट्रोल-डीजल के दामों में पहले ही आग लगी हुई है। इधर गैस सिलेंडर की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। रही-सही कसर अब बिजली ने पूरी कर दी है। सर्दी की ठिठुरन के बीच प्रदेश की जनता को दो प्रतिशत महंगी बिजली का करंट का लगा है। पेट्रोल-डीजल सहित रसोई गैस सिलेंडर में लगातार हो रही मूल्य वृद्धि को लेकर कांग्रेस को बैठे-बैठाए मुददा हाथ लग गया है और कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
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पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के लगातार बढ़ते दामों को लेकर मध्यप्रदेश में सियासत पूरे उफान पर है। कांग्रेस ने शनिवार को इंदौर, भोपाल, ग्वालियर सहित पूरे प्रदेश में कीमतों की बढ़ोत्तरी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरी, इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ता बैलगाड़ी में सवार होकर धरना स्थल तक पहंचे और सांकेतिक उपवास और धरने पर बैठे..तो भोपाल के रोशनपुरा चौक पर पूर्व ब्ड दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, अरुण यादव और विधायक आरिफ मसूद सहित कई कांग्रेसी नेताओं ने धरना दिया। कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई के लिए सीधे-सीधे केंद्र और राज्य सरकार की गलत नीतियों को दोषी ठहराया।
दरअसल पिछले डेढ़ महीने में मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसकी वजह राज्य में वैट के साथ सेस लगाना भी बताया जा रहा है। तेल में लगी आग और उससे बढ़ने वाली महंगाई से सूबे की जनता को उनके घर की बजट की चिंता सता रही थी..कि केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें और राज्य सरकार ने बिजली बिल में दो प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई का करंट जोड़ दिया है। सूबे में बढ़ती महंगाई के खिलाफ विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है तो सत्ता पक्ष का तर्क है कि महंगाई के बीच जनता को राहत भी दी जा रही है।
कुल मिलाकर तेल में लगी आग और महंगी बिजली को लेकर सूबे में आरोप-प्रत्यारोप ने दिसबंर की सर्दी में सियासी पारा को गर्म कर दिया है। अब देखना है कि महंगाई की मार से जनता को कब राहत मिलेगी ?