नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि मार्च 2026 तक भारतीय उपग्रह मिशन से उत्पन्न कुल 129 ‘ट्रैक’ करने योग्य मलबे अंतरिक्ष में मौजूद हैं।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में ऐसे 23 और भूस्थिर पृथ्वी कक्षा (जीईओ) में 26 उपग्रह मौजूद हैं, जिनका सेवाकाल समाप्त हो चुका है।
सिंह ने कहा कि इसके अलावा पीएसएलवी, जीएसएलवी और एलवीएम3 रॉकेट के अवशेष भी कक्षा में मौजूद हैं तथा पीएसएलवी सी3 रॉकेट के अवशेष के कक्षा में टूटने से उत्पन्न मलबा भी मौजूद हैं।
मंत्री ने 2024 में घोषित मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (डीएफएसएम) पहल को भी रेखांकित किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक सभी भारतीय संस्थानों, (सरकारी और निजी) द्वारा अंतरिक्ष में बिल्कुल ही मलबा उत्पन्न नहीं करना है।
उन्होंने एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में सदन को बताया कि वर्ष 2035 तक आयातित परमाणु ईंधन और रिएक्टर घटकों पर सीमा शुल्क में छूट से परियोजना लागत और बिजली उत्पादन लागत, दोनों में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि इससे परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता में सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि इससे देश में परमाणु ऊर्जा विकास की गति भी तेज होगी।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश