संसद पर हमले की 16वीं बरसी, लोकतंत्र का मंदिर बना था निशाना

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संसद पर हमले की 16वीं बरसी, लोकतंत्र का मंदिर बना था निशाना

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  • Publish Date - December 13, 2017 / 05:41 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:59 PM IST

संसद पर हुए हमले की आज सोलहवीं बरसी है आज के दिन ही 13 दिसंबर 2001 को लोकतंत्र की मंदिर पर हमला हुआ था. हमले में 9 जवान शहीद हुए थे. जवानों की शहादत की याद में आज केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट शहीदों जवानों को श्रद्धांजलि दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की

 

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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी संसद हमले में शहीद हुए जवानों को याद किया। उन्होंने ट्वीट कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। 

 

 

 

 

आतंकियों ने 16 साल पहले लोकतंत्र की मंदिर को चोट पहुंचाने की कोशिश की थी, लेकिन मातृभूमि के वीर सपूतों ने अपनी जान पर खेलकर आतंकियों के नापाक मंसूबों को नेस्तनाबूत कर दिया था. हमले में संसद भवन के गार्ड, दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल 9 जवान शहीद हुए थे। 

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्वीट कर जवानों की शहादत को सलाम किया है. 

 

पांच आतंकी सेना की वर्दी में एक अंबेस्डर कार में संसद में दाखिल हुए थे. दाखिल होत ही आतंकियों ने संसद भवन में ताबड़तोड़ फायरिंग की थी. 30-45 मिनट में जवानों ने पांचों आतंकियों को मार गिराया था. लेकिन हमारे 9 जवान भी इस हमले में शहीद हो गए थे.

संसद हमले में शामिल चार आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली की पोटा अदालत ने 16 दिसंबर, 2002 को चारों आतंकी मोहम्मद अफजल, शौकत हसैन, अफसान और सैयद रहमान गिलानी को दोषी करार दिया था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सैयद अब्दुल रहमान गिलानी और नवजोत संधू को बरी कर दिया था, लेकिन मोहम्मद अफजल की मौत की सजा को बरकरार रखी था और शौकत हुसैन की मौत की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया था। इसके बाद 9 फरवरी, 2013 को अफजल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुबह 8 बजे फांसी पर लटका दिया गया था।

 

 

 

वेब डेस्क, IBC24