बीते दो सालों में असम से 1,679 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा गया : हिमंत

बीते दो सालों में असम से 1,679 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा गया : हिमंत

बीते दो सालों में असम से 1,679 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा गया : हिमंत
Modified Date: July 13, 2026 / 06:11 pm IST
Published Date: July 13, 2026 6:11 pm IST

गुवाहाटी, 13 जुलाई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि पिछले दो साल में राज्य से बांग्लादेश के 1,600 से अधिक अवैध प्रवासियों को वापस भेजा गया है।

एआईयूडीएफ विधायक बदरुद्दीन अजमल के एक सवाल का जवाब देते हुए, शर्मा ने सदन में कहा कि यह राज्य नागरिकता के मामले में केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करता है और इस संबंध में कानूनों को लागू करते समय मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो, इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए गए हैं।

गृह और राजनीतिक विभाग भी संभाल रहे शर्मा ने कहा, “पिछले दो साल में असम से कुल 1,679 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा गया है या निर्वासित किया गया है।”

सदन में सूची साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान के बाद एक जुलाई 2024 और 30 जून 2026 के बीच उन्हें वापस भेजा गया।

जहां कुछ को ‘वापस भेजा’ गया, वहीं कुछ को ‘निष्कासन’ का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ अवैध प्रवासियों को ‘निर्वासन’ की प्रक्रिया के जरिये उनके देश भेजा गया।

शर्मा ने कहा कि अगर उच्च न्यायालय या शीर्ष अदालत में कोई अपील लंबित है, तो संबंधित अवैध प्रवासी को वापस नहीं भेजा जाता है।

घुसपैठियों को ‘वापस भेजने’ के लिए सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकता का विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

राज्य सरकार अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानून के मौजूदा प्रावधानों और केंद्र द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करती है।

उन्होंने कहा कि असम सरकार केंद्र की अनदेखी करके किसी अन्य देश के साथ सीधे संपर्क नहीं करती है।

शर्मा ने कहा, ‘‘राज्य सरकार नागरिकता संबंधी मामलों में केंद्र द्वारा जारी किए गए कानूनों और निर्देशों का पालन करती है। इन कानूनों और निर्देशों को लागू करते समय पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाते हैं, ताकि किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो।’’

भाषा

प्रशांत सुरेश

सुरेश


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