नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) सरकार की ओर से मंगलवार को लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस साल एक मार्च से अब तक देश भर में लू लगने से 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4,853 मामले सामने आए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार लू लगने से सबसे अधिक संख्या में लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई, जबकि लू लगने के सर्वाधिक मामले तेलंगाना में सामने आए।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को बताया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई करते हुए, गृह मंत्रालय ने 2026-31 की अवधि के लिए राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) के प्रबंधन के लिए संचालन दिशानिर्देशों के तहत अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं की सूची में लू और बिजली गिरने की घटनाओं को शामिल किया है।
उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जरिए राहत देने के लिए एक नीतिगत रूपरेखा लागू है।
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) के माध्यम से भीषण गर्मी से संबंधित रोगों पर राष्ट्रीय कार्य योजना के अनुसार आवश्यक कदम उठाता है।
आंकड़ों के अनुसार, लू से महाराष्ट्र में 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है, इसके बाद आंध्र प्रदेश में चार, तेलंगाना और ओडिशा में दो-दो तथा तमिलनाडु में एक व्यक्ति की जान गई।
तेलंगाना में लू (हीटस्ट्रोक) के सबसे अधिक 915 मामले सामने आए, इसके बाद पश्चिम बंगाल (733), छत्तीसगढ़ (660), आंध्र प्रदेश (540) और झारखंड (409) का स्थान रहा।
मंत्री के जवाब में बताया गया कि दिल्ली में लू लगने के 32 मामले सामने आए और कोई मौत नहीं हुई।
भाषा वैभव सुभाष
सुभाष