कोलकाता, आठ जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस का अंदरूनी संकट सोमवार को उस समय और गहरा गया जब पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)का समर्थन करने का फैसला किया है और इसकी औपचारिक जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दी जाएगी।
ममता बनर्जी की पार्टी 1998 में अपनी स्थापना के बाद से विधानसभा और संसद में हुई दोहरी बगावत की वजह से सबसे गंभीर का सामना कर रही है। तृणमूल के 80 विधायकों में से 58 ने कुछ ही दिन पहले आला कमान की अवहेलना करते हुए पार्टी के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया।
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल सोमवार को उसके संसदीय खेमे में भी फैलती नजर आई, जब बागी सांसदों के एक समूह ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)को समर्थन दिया, जबकि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के खिलाफ अखिल भारतीय स्तर पर रणनीति तैयार करने के लिए ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली में थीं।
इस नाटकीय घटनाक्रम से तृणमूल की स्थापना के बाद से पार्टी की संसदीय इकाई में पहली बार बड़ा विभाजन हुआ है और इससे देश की विपक्षी दलों में नए तरह से समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
काकोली ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बताया कि 20 सांसदों ने राजग को समर्थन देने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘करीब बीस सांसदों ने राजग को समर्थन देने की औपचारिक जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर देने का फैसला किया है और इनमें मैं भी शामिल हूं। ’’
चार बार की सांसद काकोली ने पिछले सप्ताह तृणमूल के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
काकोली ने बाद में एक समाचार चैनल से बातचीत में दावा किया कि 20 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को भेजा जा चुका है।
उन्होंने कहा, ‘‘पत्र पहले ही लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंच चुका है।’’
सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष कहा कि उनका मत है कि काकोली सदन में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित कोई भी बाद के बदलाव आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरे नहीं किए गए थे।
तृणमूल कांग्रेस ने हालांकि ममता बनर्जी द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 20 मई को लिखा गया 20 पत्र जारी किया, जिसमें कल्याण बनर्जी को मुख्य सचेतक नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा, तृणमूल ने वह पत्र भी साझा किया जिसमें काकोली ने पिछले सप्ताह पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
बागी सांसदों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बगावत करने वाले लोकसभा सदस्यों ने तत्काल तृणमूल कांग्रेस से से इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करते हुए एक अलग संसदीय गुट के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि यह रणनीति दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
सूत्रों ने बताया कि यह गणित राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। तृणमूल के वर्तमान में 28 लोकसभा सदस्य हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली हुई है। 20 सदस्यों का समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत को आसानी से पार कर जाएगा।
यह घटनाक्रम बागी सांसदों द्वारा नयी दिल्ली में एक बंद कमरे में बैठक करने के एक दिन बाद सामने आया है। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य सुखेन्दु शेखर रॉय भी शामिल हुए थे।
रॉय ने सोमवार सुबह राज्यसभा और तृणमूल दोनों से इस्तीफा दे दिया।
रॉय ने अपने कड़े शब्दों वाले इस्तीफे में कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिससे तृणमूल के ‘अराजक शासन’ का अंत हुआ है, जो भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और शासन में विफलताओं का प्रतीक था।
रॉय ने कहा, ‘‘जनता के इस ऐतिहासिक फैसले को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए, मैंने आज राज्यसभा सदस्य के रूप में और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।’’
रॉय के इस्तीफे से पार्टी के भीतर इस बात की चिंता और बढ़ सकती है कि बगावत केवल लोकसभा तक ही सीमित नहीं रहेगी। उनके इस्तीफे के बाद तृणमूल के पास संसद के ऊपरी सदन में 12 सदस्य रह गए हैं।
पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागियों पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर उस जनादेश के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया, जिसके आधार पर वे चुने गए थे।
मोइत्रा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सांसदों ने 2024 में तृणमूल के टिकट पर जीत हासिल की। राजग को जनादेश नहीं मिला था। सभी लालची, स्वार्थी और गद्दार अब भाजपा में शामिल हो जाएं, अपनी सीटों से इस्तीफा दे दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें। देखते हैं आप कितने बड़े हीरो साबित होते हैं।’’
विधानसभा में बगावत से शुरू हुआ यह मामला अब संसद तक फैल गया है, जिससे ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर के सबसे गंभीर आंतरिक संकट से जूझ रही हैं। साथ ही वह राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश भी कर रही हैं।
यह विभाजन लोकसभा सदस्यों के एक गुट तक ही सीमित रहेगा या राज्यसभा तक फैल जाएगा, यही इस संकट के अगले चरण को निर्धारित करेगा। अगर ऐसा होता है तो बंगाल की राजनीति में एक नया और अनिश्चित अध्याय खुल जाएगा और उस पार्टी की दृढ़ता की परीक्षा होगी जिसने लगभग तीन दशकों से राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर अपना दबदबा बनाए रखा है।
भाषा धीरज माधव
माधव