व्यक्ति की 24 घंटे की अवैध हिरासत के लिए उप्र सरकार को मुआवजा देने का आदेश

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व्यक्ति की 24 घंटे की अवैध हिरासत के लिए उप्र सरकार को मुआवजा देने का आदेश

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  • Publish Date - June 8, 2026 / 10:41 PM IST,
    Updated On - June 8, 2026 / 10:41 PM IST

प्रयागराज, आठ जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति की 24 घंटे की पुलिस हिरासत को अवैध करार देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़ित व्यक्ति को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

अदालत ने कहा, “पुलिस अधिकारी यह मानकर चलते हैं कि 1,000 या इससे अधिक उल्लंघन के मामलों में से मुश्किल से एक मामला ही सामने आएगा, जिसमें कोई व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए आगे आएगा और उन्हें जवाबदेह ठहराएगा। उन्हें लगता है कि ऐसे उल्लंघनों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाएगा।”

मातांबर मिश्रा नामक व्यक्ति की रिट याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा, “सभी परिस्थितियों को देखते हुए हमारा मानना है कि दुबे नामक पुलिस अधिकारी द्वारा याचिकाकर्ता को उसके स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित किया गया है। इसके लिए उसे मुआवजा दिया जाना चाहिए।”

उच्च न्यायालय ने कहा, “न्याय के उद्देश्य तभी पूरे होंगे जब याचिकाकर्ता को 26 नवंबर से 27 नवंबर, 2022 तक अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखने के लिए राज्य सरकार 25,000 रुपये का भुगतान करे।”

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो यह राशि संबंधित पुलिस अधिकारी सूर्य प्रकाश दुबे के वेतन से वसूल कर सकती है।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी अक्सर पुराने तरीके पर अड़े रहते हैं और आंकड़ों पर अधिक भरोसा करते हैं कि हजारों उल्लंघनों में से बहुत कम नागरिक ही अपने अधिकारों को लागू कराने के लिए आगे आते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारियों द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में अवैध हिरासत से इनकार नहीं किया गया है।

उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि इस निर्णय की प्रति अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस आयुक्त प्रयागराज, सहायक पुलिस आयुक्त हंडिया तथा तत्कालीन बरौत चौकी प्रभारी सूर्य प्रकाश दुबे को उपलब्ध कराई जाए।

भाषा

सं, राजेंद्र रवि कांत