जयपुर, आठ जून (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन पर राजनीतिक चालबाजी करने और कांग्रेस के अंदरूनी घटनाक्रमों के बीच खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा उम्मीदवार सतीश पूनिया ने कहा कि गहलोत ने अपनी राजनीतिक छवि “एडजस्टमेंट पॉलिटिक्स” के इर्द-गिर्द बनाई है।
पूनिया ने कहा, “अशोक गहलोत की छवि ऐसे नेता की रही है जो राजनीति में कौशल, समायोजन और प्रबंधन में माहिर हैं तथा हमेशा नेहरू-गांधी परिवार को संतुष्ट रखने का प्रयास करते रहे हैं।”
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके राजनीतिक बयान अक्सर किसी न किसी छिपे हुए उद्देश्य से प्रेरित होते हैं।
राठौड़ ने कहा, “गहलोत ऐसे नेता हैं कि जब वे सांस भी लेते हैं तो उसके पीछे राजनीति होती है। जब भी उन्हें अवसर मिलता है, उनकी राजनीतिक मंशा स्पष्ट दिखाई देती है। कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी जगजाहिर है और पार्टी की विभिन्न धाराएं लगातार एक-दूसरे पर निशाना साधती रहती हैं।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता संगठनात्मक फेरबदल की अटकलों के बीच स्वयं को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं।
राठौड़ ने आरोप लगाया, “विद्रोही तेवर अपनाकर गहलोत कांग्रेस आलाकमान में अपनी स्थिति मजबूत और सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।”
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दावा किया कि कांग्रेस में सचिन पायलट को नयी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चाओं से गहलोत खेमे में बेचैनी है।
शेखावत ने कहा, “कांग्रेस में सचिन पायलट को नयी जिम्मेदारी देने की चर्चा चल रही है। ऐसे हालात में गहलोत असहज महसूस कर रहे हैं और उनकी बेचैनी समय-समय पर सामने आती रहती है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं।
शेखावत ने कहा, “गहलोत राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले चार दशकों से वे राजस्थान की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और अब उन्हें उस स्थिति के कमजोर पड़ने का भय है।”
भाषा
बाकोलिया रवि कांत