2013 यौन उत्पीड़न मामला: तरुण तेजपाल ने पीड़िता के ‘विरोधाभासी’ बयानों पर उठाए सवाल
2013 यौन उत्पीड़न मामला: तरुण तेजपाल ने पीड़िता के ‘विरोधाभासी’ बयानों पर उठाए सवाल
पणजी, 16 जुलाई (भाषा) तहलका पत्रिका के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल ने अपने खिलाफ 2013 में दर्ज यौन-उत्पीड़न के मामले में पीड़िता के ‘विरोधाभासी’ बयानों पर बृहस्पतिवार को बम्बई उच्च न्यायालय के समक्ष सवाल खड़े किये।
यद्यपि, गोवा की मापुसा अदालत ने 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने इस फ़ैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने बृहस्पतिवार को सरकार की अपील पर अंतिम दलीलों की सुनवाई शुरू की।
यह मामला तेजपाल की एक पूर्व महिला सहयोगी के आरोपों से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया था कि सात और आठ नवंबर 2013 को गोवा में तहलका पत्रिका के एक समारोह के दौरान होटल की लिफ़्ट में तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था।
न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने सरकार की अपील पर अंतिम दलीलों की सुनवाई शुरू की।
सुनवाई के दौरान, पीठ के सामने उस होटल की लिफ्ट के वीडियो क्लिप दिखाए गए, जहां कथित तौर पर यह घटना हुई थी। हालांकि इन क्लिप को सिर्फ़ अदालत कक्ष में मौजूद लोगों को ही दिखाया गया।
तेजपाल की ओर से पेश वकील आबाद पोंडा ने जांच अधिकारी और अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयानों में मौजूद विरोधाभासों की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा कि अपनी पुलिस शिकायत में पीड़िता ने लिफ्ट में ‘‘दो मिनट के सदमे’’ का ज़िक्र किया था। पोंडा ने बताया कि महिला का दावा था कि आरोपी लिफ्ट के बटन दबाता रहा, ताकि लिफ्ट चलती रहे।
उन्होंने कहा कि लिफ्ट विशेषज्ञों और होटल के सुरक्षा प्रभारी की गवाही से यह साबित हो गया कि महिला का बयान गलत था, क्योंकि ‘‘होटल की लिफ़्ट में कोई फंस नहीं सकता।’’ पोंडा ने अदालत से कहा, ‘‘होटल की लिफ़्ट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कोई भी अंदर फंस न सके।’’
उन्होंने वीडियो क्लिप आगे दिखाते हुए दलील दी कि पीड़िता का कहना है कि उसे लिफ़्ट में पीछे खींचा गया और उसके साथ बदसलूकी की गई, लेकिन वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखता।
पोंडा ने अदालत को बताया, ‘‘सबूतों से यह भी पता चलता है कि जब वे लिफ़्ट से नीचे उतरे तो वह (तेजपाल) पीड़िता से आगे थे, इसलिए उनके महिला के पीछे रहने का सवाल ही नहीं उठता।’’
सत्र अदालत ने 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि शिकायतकर्ता ने ऐसा कोई व्यवहार नहीं प्रदर्शित किया, जो यौन उत्पीड़न की कोई पीड़िता आमतौर पर दिखाती है।
शिकायतकर्ता के व्यवहार और बर्ताव पर की गई टिप्पणियों के लिए निचली अदालत के फैसले की कई तरफ से आलोचना हुई थी।
उच्च न्यायालय की पीठ शुक्रवार को भी दलीलें सुनेगी।
भाषा सुरेश नरेश
नरेश

Facebook


