हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी की दिशा में अहम कदम: विशेषज्ञ
हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी की दिशा में अहम कदम: विशेषज्ञ
(कृष्ण)
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन रेलवे जैसे अत्यधिक ऊर्जा-खपत वाले क्षेत्र में जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि देश के अधिकांश ‘ब्रॉड गेज’ रेल नेटवर्क के पहले से ही विद्युतीकृत होने के कारण इसकी भूमिका सीमित रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु लक्ष्यों में हाइड्रोजन की दीर्घकालिक भूमिका सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन उपलब्ध होने पर निर्भर करेगी, जिसका उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा से किया जाता है। यह भी देखना होगा कि क्या यह किसी विशेष रेल मार्ग पर आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी साबित होती है।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरियाणा में जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन सेवा की शुरुआत करेंगे। दोनों शहरों के बीच 89 किलोमीटर की दूरी ट्रेन लगभग दो घंटे में तय करेगी और इस दौरान 12 स्टेशनों पर रुकेगी।
रेल मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में बताया कि 10 डिब्बों वाली इस ट्रेन को 1,200 किलोवाट क्षमता वाली हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रणोदन प्रणाली से संचालित किया जाएगा। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
शिव नादर विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग स्कूल के प्रोफेसर हरप्रीत सिंह अरोड़ा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सरल शब्दों में समझें तो हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रणोदन प्रणाली में फ्यूल सेल के भीतर हवा से प्राप्त ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को मिलाकर बिजली उत्पन्न की जाती है। यही बिजली ट्रेन की मोटरों को चलाती है।’’
नयी दिल्ली स्थित ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट’ (सीएसई) के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कार्यक्रम से जुड़ी मौसमी मोहंती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेन मूल रूप से एक इलेक्ट्रिक ट्रेन है, जो अपनी बिजली खुद ही ट्रेन के भीतर उत्पन्न करती है। यह ओवरहेड बिजली लाइनों से ऊर्जा लेने के बजाय, उच्च दबाव वाले टैंकों में संग्रहित हाइड्रोजन को हवा से प्राप्त ऑक्सीजन के साथ फ्यूल सेल में अभिक्रिया कराकर बिजली पैदा करती है।’’
उन्होंने बताया कि इससे होने वाला एकमात्र प्रत्यक्ष उत्सर्जन जलवाष्प होता है।
हाइड्रोजन को ‘‘स्वच्छ ईंधन’’ माना जाता है क्योंकि इसके जलने से कोई हानिकारक प्रदूषक नहीं निकलते।
मोहंती ने बताया कि ट्रेन के लिए हाइड्रोजन ईंधन ‘‘अलग से बनाया जाता है, ईंधन स्टेशन तक पहुंचाया जाता है और ट्रेन में लगे भंडारण टैंक में भरा जाता है।’’
बयान में कहा गया है कि ट्रेन के लिए जींद में हाइड्रोजन भंडारण और पुनर्भरण सुविधा स्थापित की गई है।
अरोड़ा ने कहा, ‘‘हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत भारत के ऊर्जा बदलाव के लिए अहम है, क्योंकि यह साफ-सुथरे और कम उत्सर्जन वाले परिवहन की दिशा में एक कदम है। यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाकर भारत के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करती है, खासकर रेलवे जैसे क्षेत्रों में, जहां बहुत ज्यादा ऊर्जा की खपत होती है।’’
भाषा शफीक अविनाश
अविनाश

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