गुजरात में इस मॉनसून के दौरान चांदीपुरा वायरस से 22 बच्चों की मौत हुई, सात का इलाज जारी

गुजरात में इस मॉनसून के दौरान चांदीपुरा वायरस से 22 बच्चों की मौत हुई, सात का इलाज जारी

गुजरात में इस मॉनसून के दौरान चांदीपुरा वायरस से 22 बच्चों की मौत हुई, सात का इलाज जारी
Modified Date: August 3, 2026 / 09:33 pm IST
Published Date: August 3, 2026 9:33 pm IST

अहमदाबाद, तीन अगस्त (भाषा) गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंसेरिया ने सोमवार को बताया कि इस मॉनसून सीजन में राज्य में चांदीपुरा वायरस (सीएचपीवी) से 22 बच्चों की मौत हो गई है। उन्होंने बताया कि सीएचपीवी के 184 संदिग्ध मामलों में से 35 नमूनों में संक्रमण मिला है।

पंसेरिया ने कहा कि गांधीनगर, राजकोट और अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों में सात मरीजों का उपचार जारी है, और सरकारी व निजी बाल चिकित्सालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लक्षण वाले मरीजों को तुरंत आईसीयू बेड पर भर्ती करें, ताकि अंगों के काम करना बंद करने से उन्हें बचाया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “राज्य में अब तक कुल 184 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 35 मरीज संक्रमित पाए गए हैं और 11 नमूनों के नतीजे अभी आने बाकी हैं।”

उन्होंने कहा कि अब तक सामने आए मामलों में से 22 बच्चों की मौत चांदीपुरा वायरस की वजह से हुई है।

उन्होंने कहा कि सभी मरीज 15 साल से कम उम्र के हैं।

पंसेरिया ने कहा कि गांधीनगर, साबरकांठा-हिम्मतनगर, पाटन, राजकोट और भावनगर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती बच्चों का बेहतरीन और विशेषज्ञों द्वारा इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर बच्चों की हालत पर नजर रखे हुए हैं।

उन्होंने बताया कि मामले अलग-अलग इलाकों से सामने आ रहे हैं और किसी एक खास गांव तक सीमित नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य टीम उन इलाकों में कीटनाशक का छिड़काव कर रही हैं, जहां पशुपालन किया जाता है, ताकि ‘सैंडफ्लाई’ (रेत मक्खी) को खत्म किया जा सके, जो विषाणु के प्रसार के लिए जिम्मेदार हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकारी और निजी बाल चिकित्सा केंद्रों को निर्देश दिया गया है कि वायरस के लक्षण वाले मरीजों को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सुविधाओं से युक्त आईसीयू बेड पर भर्ती किया जाए तथा इलाज में देरी न की जाए, ताकि कई अंगों के काम करना बंद कर देने जैसी गंभीर स्थितियों से बचा जा सके।

चांदीपुरा एन्सेफलाइटिस एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से ‘सैंडफ्लाई’ (रेत मक्खी) और अन्य कीटों के जरिए फैलती है। यह बीमारी मस्तिष्क में सूजन का कारण बनती है। इस वायरस को पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव के एक मरीज से अलग किया गया था।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप


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