कोलकाता, 25 मई (भाषा) भूमि हड़पने के रैकेट के संबंध में कोलकाता पुलिस के लगभग 30 अधिकारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि विभिन्न रैंक के पुलिसकर्मियों के एक ऐसे गिरोह से संबंध होने का संदेह है, जिस पर वरिष्ठ नागरिकों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर संपत्तियां बेचने के लिए मजबूर करने का आरोप है।
जांच से जुड़े ईडी के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘जांच के दौरान कई पुलिसकर्मी संदेह के घेरे में आ गए हैं। उनकी सटीक भूमिका की जांच की जा रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें कुछ दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है। जांच अब धन के स्रोत का पता लगाने और सभी लाभार्थियों की पहचान करने पर केंद्रित है।’’
ऐसा प्रतीत होता है जब्त किए गए मोबाइल फोन से कुछ डेटा को डिलीट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक जांच के जरिए डेटा को पुनः प्राप्त करने के प्रयास जारी हैं।
ईडी फिलहाल इस कथित रैकेट में गिरफ्तार तीन आरोपियों बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास और व्यवसायी जॉय कामदार की भूमिका की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह गिरोह धमकाने और पुलिस के प्रभाव का दुरुपयोग करके काम करता था।
आरोप है कि सोना पप्पू ने संबंधित संपत्ति मालिकों को धमकाया, जबकि बिस्वास पर स्थानीय पुलिस तंत्र का इस्तेमाल कर पीड़ितों पर दबाव बनाने और उन्हें कम कीमत पर अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर करने का आरोप है। वहीं, कामदार से जुड़े कारोबारी नेटवर्क के जरिए इन संपत्तियों को खरीद कर उनका विकास किया गया।
जांच के तहत, ईडी के अधिकारियों ने शुक्रवार को कारोबारी मोहम्मद अली उर्फ मैक्स राजू, सिन्हा बिस्वास के भतीजे सौरभ अधिकारी और उप निरीक्षक रुहिल अमीन अली से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली। उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले में सिन्हा बिस्वास के आवास की भी तलाशी ली।
सूत्रों के अनुसार, सोना पप्पू और सिन्हा बिस्वास से पूछताछ के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर ये छापे मारे गए।
सिन्हा बिस्वास की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद, सोना पप्पू को पिछले हफ्ते कई घंटों की पूछताछ के बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। कामदार को इससे पहले अप्रैल में इसी मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
भाषा आशीष दिलीप
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