नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि देश भर के विद्यालयों में लड़कों और लड़कियों के लिए 30,458 शौचालय बनाए गए हैं, जबकि 4,236 निर्माणाधीन हैं।
सरकार ने न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ को बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने विद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों में सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।
केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि उन्होंने पिछली तिमाही की जानकारी देते हुए अनुपालन हलफनामा दाखिल किया है।
भाटी ने पीठ ने बताया, ‘‘राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने रिपोर्ट दी है कि 77 प्रतिशत, यानी 30,458 ऐसे शौचालय बनाए गए हैं जिनमें लड़कों और लड़कियों के इस्तेमाल के लिए अलग-अलग स्थान है। 11 प्रतिशत, यानी 4,236 शौचालय निर्माणाधीन हैं और 12 प्रतिशत, यानी 4,745 शौचालयों की कमी है।’’
उच्चतम न्यायालय ने 30 जनवरी को दिए गए एक फैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है।
न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में मौजूद प्रत्येक सरकारी या निजी स्कूल में लड़के-लड़कियों के लिए जल सुविधा वाले अलग-अलग शौचालय हों।
उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया था कि प्रत्येक स्कूल छात्राओं को मुफ्त में सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएं।
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान भाटी से सवाल किया कि कितने राज्यों ने सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इसपर उन्होंने जवाब दिया, ‘‘सभी ने शुरू कर दिया है।’’
पीठ ने सवाल किया, ‘‘केंद्र सरकार के तौर पर आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि इन निर्देशों का अक्षरशः और मूल भावना के अनुरूप पालन हो?’’
भाटी ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की ‘मदद’ कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम मिलकर काम कर रहे हैं। हम स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के ‘नेशनल हेल्थ मिशन’ और ‘समग्र शिक्षा अभियान’ नामक दो योजनाओं के तहत धन मुहैया करा रहे हैं।’’
भाटी ने कहा कि अनुपालन हलफनामे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का संकलन शामिल है।
पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को सूचीबद्ध करते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने 30 जनवरी के अपने फैसले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों का उद्देश्य सभी विद्यालयों में इन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।
न्यायालय ने यह फैसला जया ठाकुर की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनाया गया। याचिका में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में छठी से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए केंद्र सरकार की नीति को पूरे देश में लागू करने का अनुरोध किया गया था।
भाषा धीरज जोहेब
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