पांच वर्षों में 23 आईआईटी से 45 छात्रों के आत्महत्या करने की सूचना, 28 एससी, एसटी, ओबीसी समूहों से

पांच वर्षों में 23 आईआईटी से 45 छात्रों के आत्महत्या करने की सूचना, 28 एससी, एसटी, ओबीसी समूहों से

पांच वर्षों में 23 आईआईटी से 45 छात्रों के आत्महत्या करने की सूचना, 28 एससी, एसटी, ओबीसी समूहों से
Modified Date: September 22, 2026 / 10:33 pm IST
Published Date: September 22, 2026 10:33 pm IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) देशभर के 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में 2020-21 से 2024-25 के बीच कुल 45 छात्रों ने आत्महत्या की। इनमें से 28 मामले अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों से जुड़े छात्रों के थे। आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

ये आंकड़े आठ दिसंबर, 2025 को लोकसभा में पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के लिए सभी आईआईटी से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर संकलित किए गए हैं।

इन 28 छात्रों की संख्या इस अवधि के दौरान आईआईटी में दर्ज कुल आत्महत्याओं के 62 प्रतिशत से अधिक थी।

आत्महत्या करने वाले छात्रों में 12 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), नौ अनुसूचित जाति (एससी) और सात अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से थे। वहीं, 16 छात्र सामान्य वर्ग और एक छात्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से था।

वर्ष 2023-24 में आत्महत्याओं की संख्या में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। उस वर्ष आईआईटी में 16 छात्रों की आत्महत्या की सूचना मिली, जबकि उससे पिछले वर्ष यह संख्या छह थी। 2024-25 में आत्महत्या के 13 मामले सामने आए।

पांच वर्षों के दौरान आईआईटी-हैदराबाद में सबसे अधिक सात आत्महत्याएं दर्ज की गईं। आईआईटी-खड़गपुर, आईआईटी-दिल्ली और आईआईटी-कानपुर में छह-छह, जबकि आईआईटी-मद्रास में पांच और आईआईटी (बीएचयू)-वाराणसी में चार आत्महत्याएं दर्ज की गईं।

वर्ष 2024-25 में आत्महत्या करने वाले 13 छात्रों में से चार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), तीन अनुसूचित जनजाति (एसटी) और दो अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से थे, जबकि चार छात्र सामान्य वर्ग से थे।

आंकड़ों के संकलन में पांच वर्षों के दौरान हुई आठ अप्राकृतिक मौतों को अलग से दर्ज किया गया है। इन्हें आत्महत्या के 45 मामलों में शामिल नहीं किया गया है।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप


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