दर्द निवारक, एंटीबायोटिक दवाओं के बेहिसाब इस्तेमाल से बचें: केंद्रीय औषधि नियामक
दर्द निवारक, एंटीबायोटिक दवाओं के बेहिसाब इस्तेमाल से बचें: केंद्रीय औषधि नियामक
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने आम जनता, स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों, दवा विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को दर्द निवारक तथा एंटीबायोटिक दवाओं के बेहिसाब इस्तेमाल के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इनके अनुचित इस्तेमाल से गुर्दे की गंभीर बीमारी और इससे जुड़ी अन्य जटिलताओं का खतरा हो सकता है।
दवा नियामक ने 21 सितंबर को जारी एक परिपत्र में नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (एनएसएआईडी) और एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत, सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल की अपील की।
इसने डॉक्टर की पर्ची की अनिवार्यता का कड़ाई से पालन करने और रोगाणुरोधी दवाओं के विवेकपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि देश में दवाओं का आयात, निर्माण, बिक्री और वितरण औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार होता है।
सीडीएससीओ ने कहा कि एनएसएआईडी और एंटीबायोटिक समेत सभी दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी या विशेषज्ञ चिकित्सक की पर्ची पर ही बेची और वितरित की जा सकती हैं।
सीडीएससीओ ने कहा कि संभावित जोखिमों को देखते हुए एनएसएआईडी और एंटीबायोटिक सहित विभिन्न दवाओं को औषधि नियमावली, 1945 की अनुसूची जी, एच, एच1 और एक्स के तहत रखा गया है, जिन्हें केवल उचित चिकित्सकीय देखरेख में ही लिया जाना चाहिए।
नियामक ने कहा कि अधिकांश एंटीबायोटिक दवाएं अनुसूची एच1 में आती हैं और इन पर चेतावनी दर्ज होती है कि बिना चिकित्सकीय सलाह इनका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है।
सीडीएससीओ ने आम जनता को सलाह देते हुए कहा कि दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं को ‘बिना चिकित्सकीय सलाह के बिना सोचे समझे, बार-बार या लंबे समय तक’ नहीं लिया जाना चाहिए।
सीडीएससीओ ने दवा विक्रेताओं और वितरकों को अनुसूची एच और एच1 की दवाओं की बिक्री संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करने तथा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रण अधिकारियों को जागरुकता फैलाने तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
भाषा सुमित खारी
खारी

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