सीआरपीएफ में 2025 में आत्महत्या के 59 मामले सामने आए, 5 साल में सर्वाधिक

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सीआरपीएफ में 2025 में आत्महत्या के 59 मामले सामने आए, 5 साल में सर्वाधिक

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 08:03 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 08:03 PM IST

नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में वर्ष 2025 के दौरान आत्महत्या के 59 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, आत्महत्या करने वाले कर्मियों में 80 प्रतिशत से अधिक संख्या कांस्टेबुलरी (आरक्षी संवर्ग) के जवानों की थी।

सूत्रों ने वर्ष 2021-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कुल 262 आत्महत्या के मामलों में से 202 मामलों, यानी 77 प्रतिशत से अधिक मामलों में कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान दी, जबकि शेष मामलों में वे अवकाश पर थे।

हालांकि, इस संबंध में सीआरपीएफ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। बल के अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जवानों का बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय शुरू किए गए हैं और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में पाया गया है कि आत्महत्या की घटनाएं मुख्य रूप से पारिवारिक समस्याओं से जुड़ी होती हैं, जिन पर सेवा की कठिन परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी का अतिरिक्त दबाव भी प्रभाव डालता है।

करीब 3.25 लाख कर्मियों वाले सीआरपीएफ को देश का प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी समय बल की परिचालन क्षमता का लगभग 95 से 97 प्रतिशत हिस्सा आतंकवादियों और उग्रवादियों से निपटने अथवा कानून-व्यवस्था संबंधी ड्यूटी निभाने में तैनात रहता है।

अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 में बल के 59 कर्मियों ने आत्महत्या की, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 46, वर्ष 2023 में 57, वर्ष 2022 में 43 और वर्ष 2021 में 57 थी।

सूत्रों ने बताया कि पांच साल के आंकड़ों के अनुसार, 128 कर्मी फंदे से लटक गए, 118 ने खुद को गोली मार ली, 12 ने ज़हर खा लिया और दो-दो मामलों में कर्मियों ने ट्रेन के आगे छलांग लगा दी तथा अपनी नसें या गला काट लिया।

सूत्रों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों (जुलाई 2026 तक के 19 मामलों सहित) के दौरान आत्महत्या करने वाले कुल 281 कर्मियों में से 237 गैर-राजपत्रित रैंक के थे, 43 अधीनस्थ अधिकारी थे, जबकि एक मामला राजपत्रित अधिकारी से संबंधित था।

उन्होंने बताया कि आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान आत्महत्या करने वाले कर्मियों में लगभग 84 प्रतिशत गैर-राजपत्रित रैंक के थे।

गैर-राजपत्रित कर्मियों में कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल रैंक के जवान शामिल होते हैं। अधीनस्थ अधिकारियों में निरीक्षक, उपनिरीक्षक और सहायक उपनिरीक्षक रैंक के अधिकारी आते हैं, जबकि राजपत्रित अधिकारियों में सहायक कमांडेंट और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी होते हैं।

भाषा तान्या अविनाश

अविनाश