जयपुर, 26 जून (भाषा) राजस्थान के पाली जिले में सदियों पुरानी परंपरा से हटकर 13 वर्षीय एक बालिका को पूर्व राजपरिवार का औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। पुरुष प्रधान मानी जाने वाली इस परंपरा में यह फैसला लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
खेरवा गांव में बृहस्पतिवार को आयोजित पारंपरिक ‘पाग का दस्तूर’ समारोह में तेजस्वी कुमारी जोधा को औपचारिक रूप से पगड़ी पहनाई गई। यह समारोह उनके पिता और खेरवागढ़ वंश के प्रमुख रहे हरीश चंद्र जोधा के निधन के बाद उत्तराधिकार ग्रहण करने के प्रतीक के रूप में आयोजित किया गया।
करीब 17वीं शताब्दी के माने जाने वाले ऐतिहासिक खेरवा किले में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण और अन्य लोग शामिल हुए। क्षेत्र में पहली बार किसी लड़की को इस पारंपरिक राजपूत रीति के तहत उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी गई।
समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तेजस्वी पूरे अनुष्ठान में शामिल रहीं। शोक अवधि समाप्त होने और नयी जिम्मेदारी संभालने के प्रतीक के रूप में उनके सिर पर गुलाबी रंग की पारंपरिक पगड़ी बांधी गई।
परंपरा के अनुसार यह पगड़ी जोधपुर-मारवाड़ के पूर्व राजपरिवार की ओर से भेजी गई थी। प्राचीन रीति के अनुरूप उनके माथे पर रक्त से तिलक भी लगाया गया।
कभी जोधपुर रियासत का हिस्सा रहे पाली जिले के उन क्षेत्रों में ‘पाग का दस्तूर’ लंबे समय से प्रचलित रहा है। इस परंपरा के तहत परिवार के मुखिया के निधन के बाद उत्तराधिकारी को पगड़ी पहनाकर उत्तराधिकार सौंपा जाता है। यह केवल संपत्ति के उत्तराधिकार का नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों के हस्तांतरण का भी प्रतीक माना जाता है। हालांकि, अब तक यह परंपरा केवल पुरुष उत्तराधिकारियों तक ही सीमित रही है।
समुदाय के बुजुर्गों ने बताया कि हरीश चंद्र जोधा का कोई पुत्र नहीं था, इसलिए सामूहिक सहमति से तेजस्वी को उत्तराधिकारी घोषित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि खेरवागढ़ परिवार में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं होने के कारण पिछले करीब 65 वर्षों से यह समारोह आयोजित नहीं हुआ था।
ग्रामीणों ने इस फैसले को प्रगतिशील बताते हुए कहा कि यह सामाजिक सोच में आए बदलाव का प्रतीक है। पड़ोसी गांव के निवासी रविंद्र सिंह ने कहा कि समुदाय ने परंपरा को बनाए रखते हुए उसे समानता के आधुनिक मूल्यों के अनुरूप ढालने का प्रयास किया है।
एक अन्य ग्रामीण अजय सिंह ने कहा कि यह निर्णय तेजस्वी के पिता की सामाजिक विरासत का सम्मान करने के उद्देश्य से भी लिया गया है। उन्होंने बताया कि हरीश चंद्र जोधा दो बार सरपंच रह चुके थे और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते थे।
पूर्व सरपंच कन्हैया लाल ने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि इस क्षेत्र में पहली बार किसी बेटी को परिवार के मुखिया के रूप में मान्यता दी गई है।’’
सातवीं कक्षा की छात्रा तेजस्वी ने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए इस नयी जिम्मेदारी का भी निर्वहन करेंगी। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता के गांव के विकास संबंधी सपनों को पूरा करने का प्रयास करेंगी।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत