नियम विहीन दुनिया वैसी ही है जैसे बिना ट्रैफ़िक लाइट वाला चौराहा : चिनफिंग

नियम विहीन दुनिया वैसी ही है जैसे बिना ट्रैफ़िक लाइट वाला चौराहा : चिनफिंग

नियम विहीन दुनिया वैसी ही है जैसे बिना ट्रैफ़िक लाइट वाला चौराहा : चिनफिंग
Modified Date: September 13, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: September 13, 2026 4:14 pm IST

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रविवार को कहा कि ब्रिक्स को आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित रखने और एक बड़ा एकीकृत बाजार बनाने के लिए उभरते बाजारों और ‘ग्लोबल साउथ’ के साथ अपने करीबी रिश्तों का लाभ उठाना चाहिए।

चिनफिंग ने व्यापार, विनिर्माण, निवेश और प्राद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पांच-सूत्रीय पहल का प्रस्ताव भी रखा।

चिनफिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संगठन के सदस्य देशों के नेताओं से ‘‘ग्लोबल साउथ के लिए एकता के जरिए मजबूती का एक नया अध्याय’’ लिखने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और रेखांकित किया कि ‘जिसकी लाठी उसी की भैंस’ वाली सोच को बहुत पहले ही त्याग दिया जाना चाहिए था।

‘ग्लोबल साउथ’ का संदर्भ विकासशील और अल्प विकसित देशों के संदर्भ में किया जाता है जिनमें से अधिकतर दक्षिणी गोलार्ध में अवस्थित हैं।

चिनफिंग ने कहा, ‘‘बिना नियमों वाली दुनिया वैसी ही है जैसे बिना ट्रैफिक लाइट वाला चौराहा, जहां अफरा-तफरी और अव्यवस्था लगभग तय है। निष्पक्षता और न्याय हर कोई चाहता है, और अंतरराष्ट्रीय नियम सभी देशों को मिलकर बनाने चाहिए।’’

चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को मिलकर ‘‘अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानून के शासन की रक्षा करनी चाहिए, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों – जैसे संप्रभु समानता, आंतरिक मामलों में दखल न देना और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान – की सुरक्षा करनी चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम सभी पर लागू हों।’’

चीन के राष्ट्रपति ने कानून आधारित विश्व के संदर्भ में ‘दोहरे मापदंडों’ को छोड़ने की जरूरत बताया। उनकी इन टिप्पणियों को पश्चिमी ताकतों की ओर इशारा माना जा रहा है।

चिनफिंग ने कहा, ‘‘सभी देश, चाहे उनका आकार, ताकत या संपन्नता कुछ भी हो, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ के देशों को बहुपक्षवाद का झंडा बुलंद रखना चाहिए, संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और भूमिका को बनाए रखना चाहिए, सुधार लाने और कार्यक्षमता बढ़ाने में बहुपक्षीय संस्थाओं का समर्थन करना चाहिए, और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।’’

चीन के राष्ट्रपति ने विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार का भी आह्वान किया।

चिनफिंग ने ब्रिक्स सहयोग को बढ़ाने के लिए पांच-सूत्रीय पहल का प्रस्ताव किया जो एक समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ढांचा बनाने, व्यापार और निवेश को सुलभ बनाने, डिजिटल उद्योग के संबंधों को मजबूत करने, ‘इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग’ को आगे बढ़ाने और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के विकास के लिए एक संयुक्त पहल पर केंद्रित है।

उन्होंने पहली पहल के बारे में कहा कि चीन ब्रिक्स-‘एआई ओपन सोर्स कम्युनिटी बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। इसका उद्देश्य ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ को विकसित करने और उनके इस्तेमाल में सहयोग को बढ़ावा देना, विशेषकर एआई संगोष्ठी और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करना और एक मुक्त एआई पारिस्थितिकी तैयार करना है।

चिनफिंग ने व्यापार और निवेश को सुलभ बनाने के दूसरे पहल के संदर्भ में कहा कि चीन ब्रिक्स विशेष आर्थिक जोन साझेदारी स्थापित करने का प्रस्ताव करता है, जिसके तहत देश एक ‘इंटेलिजेंट पोर्टल’ बना सकते हैं, नीतियों में समन्वय बिठा सकते हैं और सभी के विकास के लिए एक नया रास्ता तैयार कर सकते हैं।

चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि तीसरी पहल डिजिटल उद्योग के क्षेत्र में होगी। उन्होंने कहा, ‘‘चीन ब्रिक्स डिजिटल पारिस्थितिकी क्लाउड मंच बनाने पर जोर देगा और डिजिटल कौशल विकास प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और औद्योगिक तालमेल जैसे काम करेगा, ताकि मिलकर डिजिटल अर्थव्यवस्था का विकास किया जा सके।’’

चिनफिंग ने कहा कि चौथा कदम उच्च प्रौद्योगिकी से युक्त विनिर्माण में सहयोग बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘चीन स्मार्ट कारखानें बनाने और मानक एवं नियम विकसित करने में ब्रिक्स के सदस्य देशों की मदद करने, और साथ मिलकर विनिर्माण में बदलाव और उसे बेहतर बनाने को बढ़ावा देने के लिए तैयार है।’’

चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि पांचवीं पहल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होगी। उन्होंने कहा, ‘‘चीन अभियंताओं के संयुक्त प्रशिक्षण और योग्यता मानकों की आपसी मान्यता के लिए एक ‘ब्रिक्स इंजीनियर प्रशिक्षण गठबंधन’ बनाने का प्रस्ताव रखता है। चीन वैज्ञानिक और तकनीकी नवोन्मेष के लिए एक ‘ब्रिक्स युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम’ भी शुरू करेगा, ताकि उच्च क्षमता वाले और मेधावियों को तैयार किया जा सके।’’

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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