निजी निवेशकों को 7,000 बीघा जमीन देने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत: उत्तराखंड सरकार

निजी निवेशकों को 7,000 बीघा जमीन देने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत: उत्तराखंड सरकार

निजी निवेशकों को 7,000 बीघा जमीन देने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत: उत्तराखंड सरकार
Modified Date: September 13, 2026 / 04:26 pm IST
Published Date: September 13, 2026 4:26 pm IST

देहरादून, 13 सितंबर (भाषा) निजी निवेशकों को 7,000 बीघा बेशकीमती जमीन 90 साल के पट्टे पर देने के कांग्रेस के आरोपों पर रविवार को उत्तराखंड सरकार ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और कहा कि यूआईआईडीबी के पास मात्र 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध है।

इससे पहले सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी विपक्षी दल के आरोपों को खारिज कर दिया था।

प्रदेश के प्रमुख सचिव, नियोजन एवं यूआईआईडीबी के प्रबंध निदेशक आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि मीडिया के कुछ धड़ों में यूआईआईडीबी की परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं और ऐसे में सही और तथ्यात्मक जानकारी जनता के समक्ष रखा जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘उत्तराखंड अवसंरचना एवं निवेश विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) को 7,000 बीघा भूमि मिलने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत है। यूआईआईडीबी को इतनी भूमि न तो प्राप्त हुई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने का कोई प्रयास किया गया है। वर्तमान में यूआईआईडीबी को चिह्नित भूखंड में से मात्र 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हो पाई है।’’

सुंदरम ने कहा कि यूआईआईडीबी के गठन का उद्देश्य आगामी पांच वर्षों में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने लिए सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर सृजित करना तथा निवेश परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना है।

प्रमुख सचिव ने कहा कि सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से पहले से ही औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है और इसी प्रकार यूआईआईडीबी के जरिए पर्यटन, आतिथ्य, आरोग्य, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में बड़े स्तर के पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने को एक चुनौती बताते हुए सुंदरम ने कहा कि राज्य में निजी स्तर पर भूमि खरीद की प्रक्रिया विभिन्न कारणों से जटिल है और ऐसे में सेवा क्षेत्र की निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के लिए सरकारी भूमि का एक व्यवस्थित ‘लैंड बैंक’ तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ‘लैंड बैंक’ का उद्देश्य सरकारी भूमि का अनियोजित हस्तांतरण अथवा विक्रय नहीं है, बल्कि ऐसी भूमि की पहचान एवं नियमानुसार इस्तेमाल सुनिश्चित करना है, जो वर्तमान में अनुपयोगी या आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग में नहीं आ रही है।

सुंदरम ने कहा कि उपलब्ध सरकारी भूमि का इस्तेमाल निर्धारित नियमों, प्रचलित कानूनों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड से पहले पंजाब और गुजरात में भी सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे बोर्ड का गठन किया जा चुका है और उत्तराखंड ऐसा तीसरा राज्य है।

सुंदरम ने यह भी स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित करने का अर्थ अनुपयोगी सरकारी भूमि का विक्रय नहीं है और भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा भूमि पट्टे को 90 वर्ष के लिए देने की भ्रांति फैलाई जा रही है जबकि पट्टे की अवधि 60 वर्ष है।

कांग्रेस ने शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर ‘प्रॉपर्टी डीलर’ की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार ने उद्यान विभाग सहित विभिन्न विभागों की खाली अथवा कम उपयोग वाली करीब 7,000 बीघा सरकारी जमीन का ‘लैंड बैंक’ तैयार किया है जिसे निजी निवेशकों को 90 साल तक के पट्टे पर देने की योजना है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पार्टी की आरोपपत्र समिति के अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया था कि यूआईआईडीबी के माध्यम से राज्य की बेशकीमती जमीनों को चुनिंदा कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है।

भाषा दीप्ति आशीष

आशीष


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