अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर पर दिए गए बयान के लिए महबूबा पर साधा निशाना, पूछा- ‘माफी कहां है?’

अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर पर दिए गए बयान के लिए महबूबा पर साधा निशाना, पूछा- ‘माफी कहां है?’

अब्दुल्ला ने जंतर-मंतर पर दिए गए बयान के लिए महबूबा पर साधा निशाना, पूछा- ‘माफी कहां है?’
Modified Date: July 29, 2026 / 12:57 am IST
Published Date: July 29, 2026 12:57 am IST

(तस्वीरों के साथ)

श्रीनगर, 28 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर जंतर-मंतर पर दिए गए उनके बयान को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि महबूबा ने कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग को सही ठहराने वाली टिप्पणी की थी और इसके लिए अब तक माफी नहीं मांगी है।

इस सप्ताह की शुरुआत में महबूबा ने घाटी में पूर्व में पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने का कथित रूप से बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में स्थिति अलग थी, क्योंकि सुरक्षा बल आंतकवाद से लड़ रहे थे। महबूबा ने राष्ट्रीय राजधानी में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का विरोध किया था।

बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने कभी भी कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग को सही नहीं ठहराया।

महबूबा के बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘क्या उन्होंने माफी मांगी? क्या उन्होंने ‘माफी’ शब्द का इस्तेमाल किया? अफसोस जताने और माफी मांगने में फर्क होता है। क्या ‘माफी’ शब्द का इस्तेमाल किया गया? नहीं, है न? तो फिर माफी कहां है?’’

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘आप सभी समझदार लोग हैं। अफसोस और माफी में फर्क होता है। ‘मैं अफसोस जाहिर करती हूं’ और ‘मैं माफी मांगती हूं’ – इन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। उन्होंने शायद कहा है कि ‘अगर मेरे बयान से किसी को दुख पहुंचा हो…’ जब आप ‘अगर’ जोड़ते हैं, तो इसका मतलब है कि आप असल में माफी नहीं मांग रहे हैं।’’

उन्होंने पीडीपी विधायक वहीद पारा से भी माफी की मांग की, जिन्होंने महबूबा के वीडियो को ‘‘एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मदद से तैयार किया गया’’ बताया था।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘उन लोगों का क्या करें, जिन्होंने पांच दिनों तक इसे दबाने की कोशिश की? जिन्होंने झूठ फैलाया? और जिनके झूठ का पर्दाफाश आज खुद महबूबा ने सबके सामने किया? उनमें से एक जिम्मेदार विधायक हैं। अब, क्या उन्हें विधायक बने रहना चाहिए? उनके झूठ का पर्दाफाश उनकी अपनी (पार्टी) अध्यक्ष ने किया।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पांच दिनों तक वह यही कहते रहे कि यह एआई से बनाया गया है। आज, खुद महबूबा ने कहा कि इसमें कोई एआई शामिल नहीं है।’’

पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर नीट प्रश्नपत्र लीक मामले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शकारियों के समर्थन में दिये बयान को लेकर मंगलवार को माफी मांगी।

उन्होंने कहा कि उनके बयान से प्रतीत हुआ कि वह कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग को सही ठहरा रही हैं, लेकिन वास्तव में वह कहना चाहती थीं कि घाटी में आतंकवाद के कारण सुरक्षा बलों के पास एक ‘बहाना’ होता है।

महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी के 27वें स्थापना दिवस के मौके पर यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अगर मेरी बातों से लोग आहत हुए हैं, तो मैं माफी मांगती हूं।’’

महबूबा ने 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर जाकर कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा)के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था।

दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का उन्होंने विरोध किया लेकिन ऐसा प्रतीत हुआ कि पीडीपी अध्यक्ष ने घाटी में अतीत में पैलेट गन के इस्तेमाल का बचाव किया, जिसके चलते उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उनका अभिप्राय ‘बहाना बनता है’’ शब्द से था – यानी घाटी में आतंकवाद की वजह से सुरक्षा बलों को कश्मीरियों के खिलाफ बल प्रयोग करने का बहाना मिल जाता है, लेकिन ‘‘कई लोगों से बात करते समय’’ यह शब्द उनके मुंह से गलती से निकल गया।

पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि उनके बयान का वीडियो वास्तविक है न कि छेड़छाड़ कर या कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी (एआई) जनित वीडियो। उन्होंने कहा कि उनके बयानों का गलत मतलब निकाला गया और उन्होंने लोगों से माफी मांगी।

महबूबा ने कहा, ‘‘अगर मेरे अधूरे बयान से उन लोगों को दुख या ठेस पहुंची है जो मुझे अपना मानते हैं और मुझसे बहुत उम्मीदें रखते हैं, तो मैं इसके लिए दिल से माफी मांगती हूं।’’

उन्होंने दावा किया कि जब भी पीडीपी आवाज उठाती है, तो ‘‘न केवल दिल्ली के लोग’’ बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियां भी ‘‘ख़तरा महसूस करती हैं’’।

महबूबा ने कहा, ‘‘मेरी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें की जाती हैं क्योंकि मैंने न तो दौलत जमा की है, न ही आलीशान घर बनाए हैं और न ही ऐशो-आराम की जिंदगी जी है। इसके बजाय, मैंने लोगों के साथ एक सच्चा रिश्ता बनाया है और उनके बीच मेरी विश्वसनीयता है।’’

पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राज्य का दर्जा मांगने के लिए जंतर-मंतर गए थे और उन्हें वहां जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए भी खड़ा होना चाहिए था।

उन्होंने कहा, ‘‘उमर राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर गए थे। अगर वे जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए दो मिनट भी वहां खड़े रहते तो क्या फर्क पड़ता? मैं वहां गयी थी, लेकिन मैं अपनी मर्जी से नहीं गयी थी।’’

महबूबा ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के बच्चों ने मुझे फोन करके बुलाया था क्योंकि बाहर पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों को अक्सर महाविद्यालयों,विश्वविद्यालयों और छात्रावासों में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्हें लगा कि अगर महबूबा वहां जाएंगी, तो शायद उन्हें मदद मिलेगी। मैं वहां गई और कहा कि आज पूरा भारत ही जम्मू-कश्मीर बन गया है।’’

उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) पर उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश करने का आरोप लगाया। लेकिन साथ कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

पीडीपी नेता कहा, ‘‘नेकां इसे इस तरह पेश कर रही है जैसे मैंने अफजल गुरु और मकबूल भट की मौत के फरमान पर हस्ताक्षर किए हों, या जैसे मैंने ‘कश्मीरियों को गोली मारो’ कहा हो।’’

संसद पर 2001 में हुए हमले के दोषी गुरु को 9 फरवरी, 2013 को तिहाड़ जेल के भीतर फांसी दी गई थी, जबकि जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के संस्थापक को 11 फरवरी, 1984 को फांसी दी गई थी।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने मांग की कि महबूबा अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगें।

अब्दुल्ला ने सोमवार को महबूबा से माफी की मांग करते हुए कहा कि पीडीपी अध्यक्ष को जंतर-मंतर जाने के बजाय ‘घर पर ही रहना’ चाहिए था।

उन्होंने कहा कि सत्तासीन रहे लोगों के ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बयान आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने से रोक सकते हैं।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘जब कोई पूर्व मुख्यमंत्री यह कहे कि कश्मीर में आतंकवाद से लड़ने के लिए बल प्रयोग सही है, तो उनके अधिकारों के लिए लड़ने कौन आगे आएगा? बेहतर होता अगर वह जंतर-मंतर न जातीं।’’

उन्होंने कहा था, ‘‘जब हम (नेता) केंद्र द्वारा किए जा रहे दमन और बल प्रयोग का समर्थन करेंगे, तो अगर लोग राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए विरोध करना चाहें, तो हमारा साथ कौन देगा? वे बाहर नहीं आएंगे, क्योंकि महबूबा जी ने कहा है कि ‘यह तो बनता है’ (यह स्वीकार्य है)।’’

भाषा सुरभि पारुल

पारुल


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