तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में कर्नाटक के मैसूरु, मांड्या में प्रदर्शन

तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में कर्नाटक के मैसूरु, मांड्या में प्रदर्शन

तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में कर्नाटक के मैसूरु, मांड्या में प्रदर्शन
Modified Date: July 29, 2026 / 12:53 am IST
Published Date: July 29, 2026 12:53 am IST

बेंगलुरु, 28 जुलाई (भाषा) कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने के निर्देश के विरोध में मंगलवार को कावेरी नदी घाटी क्षेत्र के प्रमुख जिलों मैसुरु और मांड्या में छिटपुट प्रदर्शन हुए।

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के अनुसार, सीडब्ल्यूआरसी ने राज्य को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया है।

मांड्या में किसानों और कन्नड़ समर्थक संगठनों के कार्यकर्ता राजमार्ग पर उतर आए और राज्य के साथ कथित अन्याय का आरोप लगाते हुए नारेबाजी के साथ मार्च निकाला।

प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर धरना देकर यातायात बाधित किया। उन्होंने सीडब्ल्यूआरसी के निर्देश के विरोध में सड़क पर लेटकर प्रदर्शन भी किया।

कन्नड़ कार्यकर्ता वाटल नागराज ने संवाददाताओं से कहा कि राज्य में भीषण सूखे की स्थिति के बीच तमिलनाडु को पानी छोड़ना कर्नाटक के साथ ‘विश्वासघात’ होगा।

नागराज ने कहा, ‘‘हम पानी की हर बूंद के लिए लड़ेंगे। जब हम हर बूंद बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे समय यदि कर्नाटक सरकार बिना उचित विवेक का इस्तेमाल किए पानी छोड़ती है, तो पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन होगा।’’

कर्नाटक रक्षणा वेदिके के एक गुट के प्रमुख कन्नड़ कार्यकर्ता प्रवीण शेट्टी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि राज्य में इस वर्ष सामान्य से केवल 20 प्रतिशत वर्षा हुई है और सभी बांध लगभग खाली हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब बेंगलुरु के लिए ही पर्याप्त पानी नहीं है, तब तमिलनाडु को प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के सीडब्ल्यूआरसी के आदेश की मैं कड़ी निंदा करता हूं। सरकार को इस मुद्दे पर दृढ़ निर्णय लेना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में तमिलनाडु के लिए पानी नहीं छोड़ा जाना चाहिए।’’

मैसुरु के किसान नेताओं ने सीडब्ल्यूआरसी के आदेश को ‘अवैज्ञानिक’ बताते हुए कहा कि इसमें इस वास्तविकता की अनदेखी की गई है कि कर्नाटक के 20 से अधिक जिले सूखे की चपेट में हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस मुद्दे पर दृढ़ रुख अपनाना चाहिए और तमिलनाडु के बजाय अपने राज्य के लोगों के हितों के साथ खड़ा होना चाहिए।

भाषा रवि कांत रवि कांत पारुल

पारुल


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