अभिषेक बनर्जी ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भाजपा की ‘एजेंसी’ बताया
अभिषेक बनर्जी ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भाजपा की ‘एजेंसी’ बताया
मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), 11 अप्रैल (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो राजनीतिक नेताओं को भाजपा की ‘‘एजेंसी’’ करार दिया तथा सत्ता में वापसी के एक महीने के भीतर मताधिकार से वंचित नागरिकों के मतदान अधिकारों को बहाल करने का वादा किया।
रेजिनगर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और एजेयूपी अध्यक्ष हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में लोगों को कमजोर करने और भाजपा को मजबूत करने के लिए काम करने वाली तीन ‘‘एजेंसियां’’ हैं।
उन्होंने कुमार पर मतदाता सूची में तार्किक विसंगतियों की आड़ में गरीबों के ‘‘मतदान अधिकार छीनने’’ का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि तृणमूल कांग्रेस के कमजोर होने पर पार्टी से कहीं अधिक नुकसान गरीबों को होगा।
बनर्जी ने कहा, ‘‘अगर तृणमूल इस क्षेत्र में कमजोर होती है तो आपको (स्थानीय लोगों को) होने वाला नुकसान तृणमूल को होने वाले नुकसान से कहीं अधिक होगा।’’
उन्होंने कबीर पर तीखा हमला बोला और एक वायरल वीडियो का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) प्रमुख की तरह दिख रहा व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस को बंगाल से अपदस्थ करने के लिए कथित तौर पर भाजपा के साथ 1,000 करोड़ रुपये के समझौते की बात करता दिखता है।
बनर्जी ने आरोप लगाया, ‘‘यह पैसा मुर्शिदाबाद की माताओं और भाइयों के लिए नहीं, सड़कों के लिए नहीं, आवास के लिए नहीं, बल्कि अपनी जेब में डालने के लिए है।’’
उन्होंने दावा किया कि कथित वीडियो में कबीर मुसलमानों को ‘‘बहुत मूर्ख’’ और आसानी से गुमराह होने वाला बता रहे हैं।
कबीर के इस दावे को खारिज करते हुए कि वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा बनाया गया है, बनर्जी ने पूछा कि अगर ऐसा है तो एजेयूपी के प्रदेश अध्यक्ष पीरजादा खोबायब अमीन ने इस्तीफा क्यों दिया।
उन्होंने पूछा, ‘‘और एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने आपका साथ क्यों छोड़ा?’’
कथित वीडियो सामने आने के बाद एजेयूपी और एआईएमआईएम के बीच का गठबंधन शुक्रवार को टूट गया।
बनर्जी ने कबीर के पिछले राजनीतिक रुख का भी जिक्र करते हुए पूछा कि 2019 में भाजपा में शामिल होने में उन्हें कोई आपत्ति क्यों नहीं थी, जिसने 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुर्शिदाबाद में एजेयूपी अब भाजपा के इशारे पर काम कर रही है।
तृणमूल नेता ने दावा किया कि कबीर बाद में तृणमूल में शामिल हुए और उनसे (बनर्जी से) मुलाकात करके कहा था कि वह ‘‘मुर्शिदाबाद में (प्रस्तावित बाबरी मस्जिद के लिए) केवल ईंटें रखेंगे तथा फिर उन्हें फेंक देंगे।’’
बनर्जी ने कहा, ‘‘मैंने कबीर से कहा कि तृणमूल धर्म की राजनीति नहीं करती। भाजपा राम मंदिर की राजनीति कर रही है और आप बाबरी मस्जिद की राजनीति कर रहे हैं। इसमें क्या फर्क है? अगर आपको बाबरी मस्जिद बनानी है, तो बनाइए। आप राजनीति से संन्यास ले लीजिए। दोनों एक साथ नहीं हो सकते।’’
कबीर ने जब अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद बनाने की योजना की घोषणा की थी तब उन्हें तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था।
बनर्जी ने व्यापक सांठगांठ का आरोप लगाते हुए अधीर रंजन चौधरी, आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी, असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर को चुनौती दी कि यदि उनका भाजपा से कोई संबंध नहीं है तो वे केंद्रीय सुरक्षा कवर छोड़ दें।
सिद्दीकी राज्य विधानसभा के निवर्तमान विधायक हैं और वह तृणमूल या भाजपा से संबंधित नहीं हैं।
मतदान अधिकारों की बहाली के संबंध में बनर्जी ने मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को आश्वासन दिया कि चार मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के दिन ‘‘मां-माटी-मानुष’’ सरकार के कार्यभार संभालने के एक महीने के भीतर उन्हें उनके मतदान अधिकार वापस मिल जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘आप इस देश के नागरिक हैं, इस राज्य के नागरिक हैं। किसी को भी चिंतित या घबराने की जरूरत नहीं है।’’
विपक्षी गठबंधनों पर अपना हमला तेज करते हुए बनर्जी ने कांग्रेस, माकपा और अन्य दलों की तुलना ‘‘सड़े हुए आलू, प्याज और बैंगन’’ से बने ऐसे भोजन से की जिससे पेट खराब हो सकता है।
बनर्जी ने कहा कि उन्होंने जिले के विकास की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली है।
उन्होंने घोषणा की, ‘‘सभी 22 सीट के विकास की जिम्मेदारी मेरी है। मैं विकास के माध्यम से प्रेम का ऋण पूरा कर रहा हूं।’’
बीरभूम जिले के सैंथिया में एक अन्य चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में हटाए गए 90 लाख नामों में से 57.5 लाख हिंदू बंगाली मतदाता हैं।
उन्होंने रैली में दावा किया, ‘‘वे हिंदू बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर उनके नाम मतदाता सूची से हटा रहे हैं।’’
भाषा
शुभम नेत्रपाल
नेत्रपाल

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