अभिषेक बनर्जी ने विधाननगर अदालत में मजिस्ट्रेट को अपनी आवाज का नमूना सौंपा
अभिषेक बनर्जी ने विधाननगर अदालत में मजिस्ट्रेट को अपनी आवाज का नमूना सौंपा
कोलकाता, 15 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए अपने कथित धमकी भरे भाषण की जांच के सिलसिले में यहां विधाननगर के उप संभागीय न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) की अदालत में बुधवार को मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी आवाज का नमूना दिया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बनर्जी को 10 जुलाई को आदेश दिया था कि वह 15 जुलाई को दोपहर 12 बजे आवाज का नमूना देने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हों।
बनर्जी आवाज का नमूना देने के लिए करीब डेढ़ घंटे तक अदालत में रहे और इस कार्य के लिए एक विशेषज्ञ भी मौजूद था।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया और अदालत परिसर से चले गए।
विधाननगर अदालत के आदेश पर पूर्व में दो तारीखों पर तृणमूल सांसद अपनी आवाज का नमूना देने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं हुए थे। जांच एजेंसी के अनुरोध पर अदालत ने तृणमूल सांसद को उपस्थित होने का आदेश दिया था।
बनर्जी की पेशी के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए यहां साल्ट लेक स्थित अदालत परिसर और उसके आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
बनर्जी के वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि जब डायमंड हार्बर से सांसद संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले न्यायालय या जांच एजेंसी के समक्ष पेश हों, तब यह सुनिश्चित किया जाए कि उन पर अंडे न फेंके जाएं और उन्हें किसी भी अन्य प्रकार के उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
बनर्जी को 30 मई को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में पार्टी के एक दिवंगत समर्थक के घर जाने के दौरान लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित धमकी भरे भाषण की जांच में ‘सहयोग नहीं करने’ पर 10 जुलाई को बनर्जी पर नाराजगी जताई थी।
न्यायाधीश सौगत भट्टाचार्य ने बनर्जी की उस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को ‘वापस लिए जाने के आधार पर’ खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जांच के सिलसिले में अपनी आवाज का नमूना देने के विधाननगर अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने बनर्जी को 21 मई के अपने आदेश का पालन करने का निर्देश दिया था। उस आदेश के तहत उन्हें 31 जुलाई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया गया था, लेकिन यह संरक्षण जांच में उनके सहयोग की शर्त पर आधारित था।
तृणमूल सांसद ने विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले 29 अप्रैल को एक जनसभा में प्रतिद्वंद्वी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित धमकी भरी टिप्पणी करने के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
भाषा
राखी पवनेश
पवनेश

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