अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में मधुमक्खी की दो दुर्लभ नई प्रजातियों की खोज
अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में मधुमक्खी की दो दुर्लभ नई प्रजातियों की खोज
ईटानगर, 15 जुलाई (भाषा) शोधकर्ताओं ने अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में एकांत में रहने वाली मधुमक्खियों (सॉलिटरी बी) की दो नई दुर्लभ प्रजातियों की खोज की है।
अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह खोज पूर्वी हिमालय की समृद्ध जैव विविधता और इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों प्रजातियों- एलाफ्रोपोडा ट्रैंगुलाटा और हैब्रोपोडा एडी की खोज बेंगलुरु स्थित ‘अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट’ (एटीआरईई) के शोधकर्ताओं ने हालिया सियांग अभियान के दौरान की।
उन्होंने बताया कि इन खोजों के बारे में ब्योरा ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ टैक्सोनॉमी’ में प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि एलाफ्रोपोडा ट्रैंगुलाटा नाम इसके पेट पर मौजूद त्रिकोणीय निशानों के आधार पर रखा गया है, जबकि हैब्रोपोडा एडी का नाम अरुणाचल प्रदेश के आदिवासी आदि समुदाय के सम्मान में रखा गया है।
अध्ययन के अनुसार, फिलहाल प्रत्येक प्रजाति के बारे में केवल एक नर नमूने की जानकारी उपलब्ध है, जिससे यह खोज महत्वपूर्ण हो जाती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इनके वितरण, पारिस्थितिकी और संरक्षण स्थिति को समझने के लिए और अधिक सर्वेक्षण की आवश्यकता है।
एकांत में रहने वाली मधुमक्खियां महत्वपूर्ण परागणकर्ता होती हैं, जो स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने और कृषि में सहायता करती हैं। शहद की मधुमक्खियों के विपरीत ये समूह में नहीं रहतीं और आमतौर पर अकेले घोंसला बनाती हैं।
शोधकर्ताओं ने आगाह किया कि आवास का नुकसान, बुनियादी ढांचे का विकास और अन्य मानवीय गतिविधियां इन नई खोजी गई प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती हैं।
यह खोज अरुणाचल प्रदेश से सामने आ रही नई प्रजातियों की बढ़ती सूची में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह राज्य अपनी समृद्ध वन्यजीव विविधता और बड़े पैमाने पर अब भी अनछुए जंगलों के लिए जाना जाता है।
अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चाउना मीन ने इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि मधुमक्खियों की इन दो दुर्लभ प्रजातियों की खोज राज्य की असाधारण प्राकृतिक संपदा और वैज्ञानिक महत्व को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि ये निष्कर्ष न केवल पूर्वी हिमालय की असाधारण जैव विविधता को उजागर करते हैं, बल्कि इस क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की आवश्यकता को भी मजबूत करते हैं।
भाषा मनीषा धीरज
धीरज

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