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नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव में केंद्रीय पैनल के चार पद में से तीन पर जीत दर्ज की, जबकि एनएसयूआई का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।
कांग्रेस से संबद्ध भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) का खाता नहीं खुल सका, हालांकि उसके उम्मीदवार अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पदों पर मामूली अंतर से हार गए।
एनएसयूआई के प्रदर्शन पर उसके बागी उम्मीदवार दीपांशु शौकीन का भी असर पड़ा, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और 13,700 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की।
एनएसयूआई चार पद में से किसी पर भी जीत हासिल नहीं कर सकी, जबकि एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की।
एबीवीपी के उम्मीदवार यश डबास अध्यक्ष चुने गए। यह जीत ऐसे समय में मिली है, जब हाल के महीनों में जंतर-मंतर पर ‘जेन-जी’ के विरोध-प्रदर्शन और सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को लेकर युवाओं में काफी हलचल थी। सत्य निकेतन हादसे में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पांच छात्रों की मौत हो गई थी।
अध्यक्ष पद के चुनाव में 24,576 वोट हासिल करने वाले डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को 2,053 मतों के अंतर से हराया।
निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। शौकीन ने एबीवीपी के इशु मौर्य और एनएसयूआई के वीर चतरथ दोनों को बड़े अंतर से हराया। शौकीन को एनएसयूआई ने टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।
सचिव पद के लिये चुनाव में एबीवीपी उम्मीदवार रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि एनएसयूआई उम्मीदवार नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले।
संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल कर जीत हासिल की, जबकि समाजवादी छात्र सभा (एससीएस) के उम्मीदवार विशेष यादव को 15,778 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। इस पद के लिये चुनाव में एनएसयूआई उम्मीदवार गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले और वह इस मुकाबले में तीसरे स्थान पर रहे।
एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर फिर से जीत हासिल की, जिन पर उसने 2025 में भी कब्जा किया था। पिछले साल उपाध्यक्ष पद जीतने वाली एनएसयूआई इस बार एक भी पद हासिल नहीं कर सकी।
शौकीन और विशेष यादव समेत निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों के काफी संख्या में वोट काटकर चुनाव परिणामों को प्रभावित किया।
भाषा आशीष दिलीप
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