सोशल मीडिया पोस्ट पर कार्रवाई सिर्फ़ डीप फेक सामग्री तक ही सीमित : वैष्णव

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सोशल मीडिया पोस्ट पर कार्रवाई सिर्फ़ डीप फेक सामग्री तक ही सीमित : वैष्णव

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  • Publish Date - June 9, 2026 / 08:38 PM IST,
    Updated On - June 9, 2026 / 08:38 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को सेंसरशिप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने की सरकार की कार्रवाई सिर्फ़ ‘डीप फेक’ सामग्री तक ही सीमित है और वास्तविक सामग्री बनाने पर कोई रोक-टोक नहीं है।

हाल ही में, यूट्यूब-आधारित चैनलों के ऑनलाइन वीडियो हटाए जाने को लेकर कई दावे किए गए हैं। ऑनलाइन आंदोलन से जुड़े ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेता अभिजीत दीपके ने भी दावा किया है कि सीबीएसई के गलत मूल्यांकन से प्रभावित एक पीड़ित के समर्थन में बनाया गया उनका वीडियो सरकार के कहने पर हटा दिया गया था।

मंत्री ने उन दावों को गलत बताया कि सोशल मीडिया मंच से विरोध प्रदर्शन के असली वीडियो हटाए जा रहे हैं।

वैष्णव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “बिल्कुल नहीं। ये फ़ेक वीडियो जहां भी हों, यह हमारी और सरकार की ज़िम्मेदारी है कि अगर कोई डीप फ़ेक वीडियो गलत या झूठी खबर फैला रहा है, तो उसे हटाया जाए।”

उन्होंने कहा कि समाज संस्थानों के बीच भरोसे पर टिका है और इस बात पर जोर दिया कि इस भरोसे को मजबूत किया जाना चाहिए।

मंत्री ने कहा, “भरोसा मजबूत करने के लिए-यानी आप जो देखते हैं उस पर यकीन करने के लिए, वह सच है या झूठ, असली है या डीपफेक-उस यकीन को अलग-अलग तकनीकी तरीकों से मजबूत करना जरूरी है, और हम यही कर रहे हैं। अगर प्रति व्यक्ति कंटेंट बनाने की बात करें, तो डीपफ़ेक वाला कंटेंट कुल बनने वाले कंटेंट का बहुत छोटा सा हिस्सा है, लेकिन यह उस समाज के लिए नुकसानदायक है जो इसे बना रहा है।”

वैष्णव ने कहा कि सरकार का मानना ​​है कि फर्जी और गलत जानकारी के बारे में एक नए कानून की जरूरत है, और वह इस पर उद्योग के साथ मिलकर काम करेगी।

सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि गलत खबरों को हटाने की जरूरत है, चाहे उसे कोई भी फैला रहा हो। इस संशोधन से सूचना और प्रसारण मंत्रालय की निगरानी व्यवस्था और कंटेंट को ब्लॉक या हटाने की शक्तियां उन उपयोगकर्ताओं तक भी बढ़ जाती हैं, जो प्रकाशक के तौर पर पंजीकृत नहीं हैं, लेकिन ऑनलाइन समाचार और समसामयिक मामलों से जुड़ी सामग्री पोस्ट या साझा करते हैं।

वैष्णव ने कहा, “सवाल बहुत सीधा है। क्या सोशल मीडिया पर फ़ेक न्यूज़ को रहने देना चाहिए या नहीं? फ़ेक न्यूज़ कौन बनाता है, यह कभी चर्चा का विषय नहीं रहा। गलत समाचार कौन बनाता है, यह कभी चर्चा का विषय नहीं रहा। चाहे गलत समाचार किसी अखबार ने बनाया हो या किसी और व्यक्ति ने, अगर वह खबर गलत है, तो उसे हटाना ही चाहिए।”

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश

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