भोपालः Bad Condition of Roads in MP मध्यप्रदेश में यूं तो दावा अमेरिका से बेहतर सड़कों का है, लेकिन जिस तरह से प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में सड़कें धंस रही हैं। गड्ढों में सड़क ढूंढ़नी पड़ रही है। लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं. लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उससे ये साफ हो रहा है कि सिस्टम में बैठे हुए सिस्टमैटिक साहेबानों को जनता से कोई सरोकार ही नहीं रह गया। ग्वालियर में हरिशंकरपुरम इलाके में सड़क धंसने के चलते रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली गड्ढे में समा गई। गनीमत रही कि कोई हादसा नहीं हुआ। अब ग्वालियर मामले में हाईकोर्ट ने नगर निगम से सड़कों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
Bad Condition of Roads in MP ये हालात केवल ग्वालियर में नहीं बल्कि सड़कों की बदहाली का आलम चहुंओर है। जबलपुर के बरगी विधानसभा के जनजातीय बहुल मोठार गांव में सड़क नहीं होने के चलते ग्रामीण 11 साल की बच्ची का शव हाथ ठेले पर रखकर कर निकलते नजर आए। साथ ही जबलपुर के पाटन गांव में ग्रामीणों ने चक्काजाम कर भोपाल मार्ग को पाटन से डायवर्ट करने का विरोध किया, क्योंकि शहपुरा ब्रिज टूटने और डायवर्सन के बाद अब तक 42 लोगों की जान जा चुकी है। इधर राजधानी भोपाल में लोगों ने गड्ढे में भरे पानी में बेशरम के पौधे के साथ बैठकर विरोध जताया। वहीं इंदौर में जर्जर सड़कों और अधूरे विकास कार्यों को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शहरभर में बीजेपी पार्षदों के खिलाफ ‘4 साल इंदौर बेहाल’ के पोस्टर लगाए गए।
इधर मध्यप्रदेश की खस्ताहाल होती सड़कों को लेकर सूबे का सियासी पारा भी चढ़ा है। कांग्रेस जहां सरकार की घेराबंदी कर रही है तो बीजेपी हाईटेक सड़कों का राग अलापते हुए डैमेज कंट्रोल करती नजर आई। लेकिन सवाल ये कि अगर सरकार टैक्स में कमी नहीं करती है तो अच्छी सड़कें क्यों मुहैया नहीं करा पा रही? सवाल ये कि जिन अधिकारियों के जिम्मे सड़क, सुरक्षा है, वो क्या कर रहे हैं? क्या वो किसी दूसरे ग्रह में रहते हैं? सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या मध्यप्रदेश में कोई विशेष अभियान चलाकर सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी? याकि सबकुछ भ्रष्टाचार निगल जाएगा?
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