अभिनेता धनुष ने समाज कल्याण की वकालत करते हुए कहा : तमिल न पढ़ पाना ‘शर्म’ की बात

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अभिनेता धनुष ने समाज कल्याण की वकालत करते हुए कहा : तमिल न पढ़ पाना ‘शर्म’ की बात

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 10:21 PM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 10:21 PM IST

चेन्नई, छह अगस्त (भाषा) हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अभिनेता धनुष ने अपने प्रशंसकों से फिल्मों से जुड़े जश्न से आगे बढ़कर अपनी सामूहिक ऊर्जा को जमीनी स्तर पर समाज कल्याण के कामों में लगाने का आग्रह किया। इसके बाद उनके तमिलनाडु की राजनीति में आने की अटकलें तेज हो गई हैं।

अपने जन्मदिन (28 जुलाई) के मौके पर ‘प्रशंसक क्लबों’ द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में धनुष ने समाज के लिए सार्थक काम करने का आह्वान किया था। उनकी इन बातों को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय समेत कई अन्य लोगों द्वारा अपनाए गए रास्ते से जोड़कर देखा जा रहा है।

धनुष ने उस दिन कहा था, “इतने सारे लोग एक जगह जमा हैं। इस तरह की एकता में बहुत बड़ी ताकत होती है। हमें उस एकता को एक मकसद देना होगा।”

उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वे फिल्म रिलीज और ऑडियो लॉन्च से आगे बढ़कर सोचें। उन्होंने कहा, “अपने इलाके के लोगों और अपने आसपास रहने वाले परिवारों की जरूरतों को समझें और हरसंभव तरीके से उनकी मदद करें।”

धनुष ने मेजबान प्रशंसक क्लब के लिए एक नया झंडा भी पेश किया — इस कदम से औपचारिक पार्टी लॉन्च की अफवाहें कुछ समय के लिए तेज हो गईं, लेकिन बाद में स्थिति स्पष्ट कर दी गई।

चार अगस्त को उन्होंने अपने पुराने शिक्षण संस्थान, शालीग्रामम स्थित थाई सत्य मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल में एक नए तीन मंजिला भवन का उद्घाटन किया। इस भवन का निर्माण उन्होंने अपने खर्च से कराया और इसे स्कूल को दान कर दिया।

पुरानी इमारत की जगह बने इस नए भवन का नाम ‘धनुष ब्लॉक’ रखा गया और एक भावुक समारोह में इसे विद्यालय को सौंप दिया गया। इस दौरान अभिनेता ने अपने पुराने शिक्षकों का आशीर्वाद लिया।

इस कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए धनुष ने कहा कि अपनी मातृभाषा न पढ़ या लिख ​​पाना गर्व की बात नहीं, बल्कि “शर्म” की बात है।

उन्होंने याद किया कि स्कूल के दिनों में उन्हें अंग्रेजी बोलने में मुश्किल होती थी और वे इसे ठीक से नहीं बोल पाते थे, लेकिन तमिल पर उनकी पकड़ हमेशा अच्छी थी। उन्होंने कहा कि आज स्थिति बिल्कुल उलट गई है।

धनुष ने दावा किया, “जब मैं बाहर निकलकर लोगों से मिलता हूं, तो 10 में से कम से कम आठ लोग तमिल पढ़ना-लिखना नहीं जानते।” उन्होंने कहा कि हालांकि युवा पीढ़ी “अंग्रेजी में बहुत माहिर” है, लेकिन उनमें तमिल साक्षरता की कमी एक “बहुत दुखद” सच्चाई है।

भाषा

प्रशांत सुरेश

सुरेश