अगर कांग्रेस आलाकमान अनुमति दे तो बहरामपुर से बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ूंगा : अधीर रंजन

अगर कांग्रेस आलाकमान अनुमति दे तो बहरामपुर से बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ूंगा : अधीर रंजन

अगर कांग्रेस आलाकमान अनुमति दे तो बहरामपुर से बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ूंगा : अधीर रंजन
Modified Date: March 19, 2026 / 05:46 pm IST
Published Date: March 19, 2026 5:46 pm IST

(सौगत मुखोपाध्याय)

कोलकाता, 19 मार्च (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि वह तीन दशकों के अंतराल के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, और अगर पार्टी आलाकमान और केंद्रीय चुनाव समिति अनुमति दे तो वह बहरामपुर सीट से मैदान में उतरेंगे।

आगामी चुनावों में कांग्रेस के सीमित तैयारी का कारण उसकी संगठनात्मक कमजोरी और समय की कमी को बताते हुए, 70 वर्षीय नेता एवं पांच बार लोकसभा सांसद रहे चौधरी ने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में पार्टी मध्य और उत्तरी बंगाल के अपने पारंपरिक गढ़ों में बढ़त बनाएगी।

चौधरी ने 1996 में मुर्शिदाबाद की नबग्राम विधानसभा सीट जीती थी और 1999 के आम चुनावों में बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने के बाद विधानसभा सीट छोड़ दी थी।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के यूसुफ पठान ने बहरामपुर सीट से चौधरी को हराया था।

चौधरी ने एक साक्षात्कार में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं कांग्रेस का एक आम कार्यकर्ता हूं और पार्टी मुझसे जो भी करने को कहेगी, मैं वह करूंगा। बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में, कांग्रेस का झंडा बुलंद रखना ही हमारा लक्ष्य है और इसीलिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राज्य के सभी वरिष्ठ नेताओं से चुनाव लड़ने का आग्रह किया। कुछ नेता सहमत हुए, तो कुछ नहीं। मैंने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।’’

कांग्रेस ने बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है क्योंकि वामपंथी दलों के साथ गठबंधन की बातचीत सफल नहीं हो पाई।

पार्टी ने अभी तक औपचारिक रूप से अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, हालांकि चौधरी ने कहा कि पार्टी सभी 294 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और मुर्शिदाबाद, मालदा, दिनाजपुर और पुरुलिया जिलों के कुछ हिस्सों में अपने मजबूत गढ़ों पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगी।

चौधरी ने दावा किया कि तीन बार की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वर्तमान में सत्ता-विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है और 2021 के चुनावों के दौरान तीव्र धार्मिक ध्रुवीकरण की ‘‘अनुपस्थिति’’ ने कांग्रेस को मौजूदा चुनावों में प्रतिस्पर्धा करने का मौका दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘2021 में, राज्य में एनआरसी-सीएए विरोधी लहर और सीतलकुची में केंद्रीय बलों द्वारा ग्रामीणों पर की गई गोलीबारी ने बंगाल के मतदाताओं के बीच धार्मिक आधार पर गहरा विभाजन पैदा किया था, जिसका ममता बनर्जी ने भरपूर फायदा उठाया और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपने पक्ष में वोट हासिल किए। वर्तमान समय में ऐसी स्थिति नहीं है।’’

वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि सीतलकुची गोलीबारी के कारण हुए धार्मिक ध्रुवीकरण ने उत्तर बंगाल में कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि बंगाल में ‘‘त्रुटिपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया’’ का विरोध करने में कांग्रेस को अन्य दलों पर ‘‘स्वाभाविक बढ़त’’ प्राप्त है, और लोगों ने बनर्जी की ‘‘मतदाता धुव्रीकरण की चाल’’ को भांप लिया है।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


लेखक के बारे में