नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बृहस्पतिवार को कहा कि विमानन कंपनियों ने भारत के प्रत्येक हज यात्री के लिए हवाई किराये में करीब 30 से 40 हजार रुपये की वृद्धि करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि यह वृद्धि 10 हजार रुपये से अधिक नहीं हो।
उन्होंने यह बयान उस वक्त दिया है जब भारतीय हज समिति ने एक परिपत्र के माध्यम से हज यात्रियों से कहा कि वह अतिरिक्त हवाई किराये के रूप में आगामी 15 मई तक 10 हजार रुपये जमा कराएं।
रीजीजू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘अनगिनत परिवारों के लिए यह एक सपना होता है कि जीवन में एक बार हज किया जाए। मैं उस भावना का गहराई से सम्मान करता हूं। वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव के कारण विमान ईंधन की कीमतों में वैश्विक वृद्धि के बीच, एयरलाइंस ने प्रति हजयात्री 300 से 400 डॉलर की भारी बढ़ोतरी की मांग की। विमान ईंधन की कीमत में बढ़ोतरी के लिए हम एयरलाइंस को भी दोषी नहीं ठहरा सकते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बातचीत के माध्यम से, हमने यह सुनिश्चित किया कि वृद्धि केवल 100 डॉलर तक सीमित रहे, जिससे प्रत्येक तीर्थयात्री को एक महत्वपूर्ण राशि की बचत हुई।’’
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘हम हर उस तीर्थयात्री की चिंताओं को साझा करते हैं जो हज करने के लिए वर्षों तक बचत करता है। यही कारण है कि हज समिति ने अपनी ओर से सख्त बातचीत की…एयरलाइंस की मांग की तुलना में प्रति हज यात्री 200-300 डॉलर तक की बचत की गई।’’
उनका कहना है कि सरकार अतिरिक्त बोझ का वहन कर रही है और हज यात्रियों को कहीं अधिक बड़े बोझ से बचा रही है।
मंत्रालय ने कहा कि हज समिति का परिपत्र पारदर्शी है, प्रक्रिया वैध है और यह निर्णय अच्छी नीयत के साथ लिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पहले से पंजीकृत एक लाख से अधिक तीर्थ यात्रियों के लिए हज 2026 का संचालन बाधित न हो।
उसने कहा, ‘‘हम प्रत्येक भारतीय मुस्लिम के लिए हज को सुलभ और किफायती बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
भारत का कुल हज कोटा 1,75,025 हज यात्रियों का है। इसमें करीब 1.2 लाख भारतीय हज समिति के माध्यम से हज पर जाते हैं तथा शेष निजी टूर ऑपरेटर के जरिये हज यात्रा करते हैं।
भाषा हक हक संतोष
संतोष