राम रहीम को को 21 दिनों का फरलो दिए जाने पर अकाल तख्त और एसजीपीसी ने आलोचना की
राम रहीम को को 21 दिनों का फरलो दिए जाने पर अकाल तख्त और एसजीपीसी ने आलोचना की
चंडीगढ़, 25 अगस्त (भाषा) दुष्कर्म के दोषी ठहराये जा चुके डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर फरलो (जेल से निर्धारित अवधि के लिये अस्थायी रिहाई) दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए मंगलवार को अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में सजा काट रहे लोगों को इस तरीके से “बार-बार” निर्धारित अवधि के लिये रिहा किया जा रहा है, जैसे वे “पिकनिक” पर जा रहे हों।
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडगज ने कहा कि दूसरी तरफ सिख कैदी हैं, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा है।
डेरा प्रमुख मंगलवार को हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल से 21 दिन की फरलो पर बाहर आया। अगस्त 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 17वीं बार है, जब वह जेल से बाहर आया है।
राम रहीम अपने दो अनुयायियों के साथ दुष्कर्म करने के मामले में 20 वर्ष जेल की सजा काट रहा है और वर्तमान में हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है।
इस साल ही उसकी यह तीसरी रिहाई है। इससे पहले उसे जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल दी गई थी।
राम रहीम सिंह को फरलो दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जत्थेदार (प्रमुख धार्मिक अधिकारी) ने इस फैसले की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों में जेल भेजे गए लोगों को “बार-बार” इस तरह रिहा किया जाता है, मानो वे “पिकनिक” पर जा रहे हों। वहीं दूसरी ओर, ‘बंदी सिंह’ हैं, जो 30 साल से अधिक समय से जेलों में बंद हैं और अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें पैरोल तक नहीं दी जा रही है।
गडगज ने कहा कि 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को अब तक अपनी बीमार माँ से मिलने के लिए पैरोल नहीं दी गई है।
कई सिख संगठन ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई और हवारा को पैरोल दिए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि वह अपनी मां से मिल सकें।
मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं और हवारा को 10 दिन का पैरोल दिए जाने के पक्ष में अपनी बात रख चुके हैं
‘बंदी सिंह’ शब्द का इस्तेमाल उन सिख कैदियों के लिए किया जाता है, जिन्हें 1990 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के दौरान सशस्त्र गतिविधियों में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया गया था।
कौमी इंसाफ मोर्चा सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर सात जनवरी 2023 से चंडीगढ़ के सेक्टर 52-53 और मोहाली के वाईपीएस चौक पर धरना देकर घेराव कर रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कार्यकारिणी समिति के सदस्य गुरप्रीत सिंह झब्बर ने डेरा प्रमुख को फरलो दिए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा, “आज एक बार फिर यह साबित हो गया है कि देश में दो तरह के कानून हैं। एक तरफ पूरा सिख समुदाय चाहता है कि सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों को रिहा किया जाए। साथ ही जगतार सिंह हवारा को पैरोल दी जानी चाहिए। दूसरी तरफ, राम रहीम सिंह को 17वीं बार पैरोल/फरलो पर रिहा किया गया है।”
डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय सिरसा में है तथा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में इसके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। हरियाणा में इसके सबसे अधिक अनुयायी सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और हिसार में हैं।
भाषा रंजन माधव
माधव

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