नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई में देरी की शिकायत पर कहा कि ‘सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है’।
न्यायालय ने यह टिप्पणी तब की जब मानहानि मामले में शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि राहुल गांधी के खिलाफ दायर मामले को लंबे समय से शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
उच्चतम न्यायालय राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पिछले साल 29 मई के आदेश को चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय ने गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अधीनस्थ अदालत के समन आदेश को चुनौती दी थी।
यह मामला 2022 की उनकी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान भारतीय सेना के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल चार अगस्त को लखनऊ की अदालत में लंबित इस मामले में आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी।
चार दिसंबर को उच्चतम न्यायालय ने गांधी की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए कहा था कि वह मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा। इसके बाद मामले को 22 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
बुधवार को एक अन्य मानहानि मामले से जुड़ी दो अलग-अलग लंबित याचिकाओं में जल्द सुनवाई की मांग वाली अर्जियां प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थीं।
इन दोनों याचिकाओं को इसके पहले गांधी की याचिका के साथ जोड़ दिया गया था।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि मामले पर सुनवाई की जाए और इसे उन दो अलग-अलग याचिकाओं से अलग किया जाए।
पीठ ने भाटिया से इस संबंध में उचित आवेदन दाखिल करने को कहा।
भाटिया ने पीठ से आग्रह किया कि गांधी की याचिका पर सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय की जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले आदेश में कहा गया है कि इसे 22 अप्रैल को सूचीबद्ध किया जाए। सिर्फ इसलिए कि एक व्यक्ति (गांधी) इसमें शामिल हैं, मामले को सूचीबद्ध नहीं किया जा रहा है। मैं केवल इतना कह रहा हूं कि मामले की सुनवाई की जाए और इसे अलग कर दिया जाए।’’
पीठ ने कहा, ‘‘आप प्रक्रिया का पालन करें और जल्द सुनवाई के लिए अर्ज़ी दाखिल करें। सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। आप अलग अर्ज़ी दाखिल करें।’’
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश