जितने कृषि समझौते हुए, देश और किसानों के हित में हुए हैं: शिवराज सिंह चौहान

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जितने कृषि समझौते हुए, देश और किसानों के हित में हुए हैं: शिवराज सिंह चौहान

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 06:36 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 06:36 PM IST

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) अमेरिका और अन्य देशों के साथ कृषि समझौतों से भारतीय किसानों का नुकसान होने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को कहा कि जितने कृषि समझौते हुए हैं वो देश और किसानों के हित में हुए हैं तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रहते देश के और किसानों के हित सुरक्षित हैं।

लोकसभा में वर्ष 2026-27 के लिए कृषि मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए यह भी कहा कि इस विषय पर मुख्य विपक्षी दल का रुख ‘‘हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और’’ जैसा है।

कृषि मंत्री के जवाब के बाद सदन ने वर्ष 2026-27 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों को स्वीकृति प्रदान की।

चौहान ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते के संदर्भ में कहा कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने कृषि समझौतों पर बेवजह अंगुली उठाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक किसान के रूप में, एक नागरिक के रूप में और कृषि मंत्री के रूप में जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं जितने कृषि समझौते हुए, वे देश और किसानों के हित में हुए हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते भारत और किसानों के हित सुरक्षित हैं। हम कृषि में भी दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे और आत्म-निर्भर बनेंगे।’’

चौहान ने मुख्य विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जब राजनीति केवल सत्ता का गणित बनती है तो कांग्रेस बन जाती है और राजनीति जब राष्ट्र की आत्मा का संगीत होती है तो जनता की सेवा और भाजपा हो जाती है।’’

कृषि मंत्री ने चर्चा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नहीं बोलने पर उनकी भी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत (पूर्ववर्ती) सरकार ने कृषि लागत पर 50 प्रतिशत के फार्मूले के आधार पर एमएसपी देने से इनकार कर दिया था, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2019 में तय किया कि लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा जोड़कर ही एमएसपी घोषित की जाएगी।

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से सिर्फ छह बार किसान का जिक्र किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 207 बार किसान का उल्लेख किया है।

उन्होंने कहा कि पंजाब की सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू नहीं करके वहां के किसानों का नुकसान किया है, वहीं पश्चिम बंगाल की सरकार ने केंद्र द्वारा निर्धारित चार जिलों में पीएम धन धान्य योजना को लागू नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का नाम जुड़ने से कुछ सरकारें परेशान क्यों हो जाती हैं। योजना सारे देशों के लिए होती हैं। मेरी पश्चिम बंगाल और पंजाब की सरकारों से प्रार्थना है कि इन जन कल्याणकारी योजनाओं में राजनीति नहीं करें।’’

चौहान ने पंजाब में बाढ़ के बाद केंद्र की ओर से मुआवजा नहीं देने के कांग्रेस सदस्यों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जितने प्रावधान तत्काल हो सकते थे, केंद्र ने किये और किसी राज्य के साथ भेदभाव का कोई सवाल नहीं।

उन्होंने कहा सरकार का लक्ष्य वैश्विक अनिश्चितता के बीच देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आजीविका और आय बढ़ाना तथा पोषक आहार जनता को मिले, यह सुनिश्चित करना है।

चौहान ने कहा कि देश में धान, गेहूं, मक्का, मूंगफली और सोयाबीन में सर्वकालिक रिकार्ड उत्पादन हुआ है, वहीं धान उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर एक पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि देश में बीजों की उन्नत किस्में विकसित करने पर लगातार अनुसंधान चल रहा है और दुनिया की पहली दो जीनोम एडिटेड धान की किस्में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) विकसित कर चुका है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने प्राकृतिक खेती मिशन प्रारंभ किया ताकि धरती की उत्पादक क्षमता खत्म नहीं हो और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा सके।

कृषि मंत्री ने कहा, ‘‘18 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती मिशन में पंजीकरण कराया है और आठ लाख एकड़ से अधिक भूमि पर इसे अपनाया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम धीरे-धीरे इस दिशा में देश को बढ़ाएंगे।’’

चौहान ने कहा कि देश में विभिन्न स्थानों से घटिया बीज, खराब गुणवत्ता वाले कीटनाशकों और खाद का मुद्दा सामने आया, जिसमें कार्रवाई भी हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि नया कीटनाशक और बीज कानून लाया जाए। पुराने कानून में बहुत कम जुर्माना था। हमारी सरकार विचार विमर्श कर रही है और जल्द नया कानून लाएंगे।’’

उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘भारत विस्तार’ नाम का एआई मंच बनाया है जिसके माध्यम से किसान कोई समस्या होने पर अपनी फसल आदि की तस्वीर खींचकर उस पर डाल देंगे और उन्हें उनकी भाषा में ही समाधान मिल जाएगा।

भाषा वैभव माधव

माधव