पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के मुद्दे पर सभी एकजुट: बघेल

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के मुद्दे पर सभी एकजुट: बघेल

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के मुद्दे पर सभी एकजुट: बघेल
Modified Date: July 11, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: July 11, 2026 8:42 pm IST

चंडीगढ़, 11 जुलाई (भाषा) पंजाब के लिए कांग्रेस के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने शनिवार को दावा किया कि राज्य में पार्टी आलाकमान के राज्य प्रमुख के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, जबकि जालंधर के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी लोगों का कहना है कि वे ऐसा नेता चाहते हैं, जो “समझौता न करने वाला” हो।

दोपहर के आस-पास, बघेल ने यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी विधायक राणा गुरजीत के सेक्टर-4 स्थित घर पर लगभग 80 मिनट तक बैठक की। चन्नी और उनके करीबी नेता इसमें शामिल हुए, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग इसमें शामिल नहीं हुए।

बैठक के तुरंत बाद बघेल रायपुर के लिए रवाना हो गए। हवाई अड्डे जाते समय वडिंग भी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के साथ थे और उन्होंने स्वयं कार चलाई।

दिल्ली पहुंचने पर बघेल ने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया, “सबकुछ ठीक है। (पंजाब कांग्रेस में) सब अच्छा है।”

कांग्रेस ने एक जुलाई को घोषणा की थी कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष बने रहेंगे और जालंधर से सांसद चन्नी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने से ‘‘नाराज’’ बताए जा रहे चन्नी ने अब तक बघेल से मुलाकात नहीं की थी। बघेल सोमवार को पंजाब पहुंचे थे और इसके बाद उन्होंने राज्य के कई नेताओं एवं पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं। चन्नी के करीबी कई नेता भी इन बैठकों से दूर रहे थे।

शनिवार की बैठक के कुछ ही समय बाद, वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पत्रकारों को बताया कि कार्यकर्ताओं की भावनाएं पहुंचा दी गई हैं और यह भी कहा गया कि पार्टी में कभी-कभी फैसले वापस लेने पड़ते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि चन्नी खेमे को वडिंग मंजूर नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) के शासन में हालात ऐसे हैं कि भ्रष्टाचार फैला हुआ है और कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है; सिर्फ एकजुट कांग्रेस ही भगवंत मान सरकार का मुकाबला कर सकती है और इसके लिए उन्हें ऐसे नेता की जरूरत है, जो सरकार का सामना कर सके और निडरता व मजबूती से अपनी बात रख सके।

रंधावा ने किसी का नाम लिये बिना पंजाबी में कहा, “सानू ठोक के बोलने वाला लीडर चाहिए, सानू कंप्रोमाइज्ड लीडर की नहीं जरूरत।” (हमें पुरजोर तरीके से अपनी बात कहने वाला नेता चाहिए, समझौता करने वाले नेता की जरूरत नहीं है)।

सोमवार को पंजाब पहुंचने के बाद बघेल ने कहा कि उन्होंने कई नेताओं के साथ बैठकें कीं और उनमें से कई नेताओं ने उन्हें अपने आवास पर आमंत्रित किया था।

पंजाब में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने हैं, इसलिए कई संबंधित समितियों के साथ भी बैठकें की गईं।

चन्नी गुट के साथ अपनी मुलाकात पर बघेल ने कहा, “मैंने सभी साथियों से बात की और उन्होंने मेरे साथ अपनी राय साझा की। पार्टी आलाकमान के फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, वे सभी आलाकमान के साथ हैं।”

उन्होंने कहा, “सभी एकजुट हैं। हमारे साथियों ने कुछ मुद्दे उठाए थे और प्रभारी महासचिव के तौर पर मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं सभी के हितों की रक्षा करूंगा और ध्यान रखूंगा।”

उन्होंने विस्तार ने जानकारी न देते हुए कहा, “दूसरी बात, कुछ सहयोगियों ने कुछ चिंताएं जताई हैं, जिन्हें मैं आलाकमान तक पहुंचाऊंगा।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वडिंग को बदलने की मांग की गई थी, बघेल ने कहा, “ऐसी कोई बात नहीं हुई”।

चन्नी वरिष्ठ नेताओं रंधावा, भारत भूषण आशु और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा व अन्य के साथ गुरजीत के आवास पर पहुंचे।

बैठक में विपक्ष के नेता और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा – जिन्हें गुरजीत सिंह ने आमंत्रित किया था – और पूर्व उपमुख्यमंत्री ओ.पी. सिंह भी मौजूद थे।

रंधावा की “समझौता करने वाले नेता” वाली टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए वडिंग ने पत्रकारों से कहा, “कौन समझौता करने वाला है? क्या रंधावा जी ने किसी का नाम लिया है? अगर नहीं, तो आप लोग मेरी ओर इशारा क्यों कर रहे हैं?”

साथ ही, वडिंग ने कहा कि रंधावा और वह पिछले लगभग पांच वर्षों से साथ काम कर रहे हैं और अगर उनमें से कोई भी समझौता करता या गलत रास्ते पर होता, तो वे इतने लंबे समय तक साथ नहीं रह पाते।

वडिंग ने कहा, “लेकिन रंधावा की यह बात सही है कि हमारी पार्टी में कोई ‘स्लीपर सेल’ या समझौता करने वाला नेता नहीं होना चाहिए। कई नेताओं पर भाजपा नेताओं, उत्तर प्रदेश के कुछ नेताओं और कभी-कभी आम आदमी पार्टी के नेताओं से भी मिलने के आरोप लगते रहे हैं। पंजाब को ऐसे नेताओं और ‘स्लीपर सेल’ की जरूरत नहीं है, जो समझौता कर लेते हों।”

बाद में, यहां हवाईअड्डे के बाहर एक और छोटी सी बातचीत में बघेल ने कहा, “हां, मैं मानता हूं कि अगर कोई नेता समझौता कर लेता है, तो काम नहीं चलेगा। अगर कोई नेता भाजपा, आप या किसी और के साथ समझौता कर लेता है, तो बात नहीं बनेगी। यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।”

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पंजाब चुनाव के लिए चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने को लेकर कोई बात नहीं हुई।

उन्होंने कहा, “ऐसी कोई बात नहीं हुई। हम बस यही चाहते हैं कि कांग्रेस सरकार बनाए।”

राणा गुरजीत के घर में घुसने से पहले यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें वडिंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में स्वीकार हैं, चन्नी ने कहा कि सभी मुद्दों पर बैठक में चर्चा होगी।

जब उनसे कहा गया कि उनके कई समर्थकों ने वडिंग का नेतृत्व स्वीकार नहीं करने की बात कही है, तो चन्नी ने कहा, ‘‘पहले चर्चा कर लेने दीजिए। आपको शुरू से ही हमारा रुख पता है।’’

उन्होंने रहस्यमय अंदाज में कहा, ‘‘बाकी तेल देखेंगे, तेल की धार देखेंगे।’’

शुक्रवार शाम ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में चन्नी ने लिखा, “पंजाब के लिए एकजुट। हमने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल जी को 11 जुलाई को आमंत्रित किया है, ताकि उनके सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पंजाब के लोगों की भावनाएं रखी जा सकें।”

बैठक में उनके शामिल न होने के बारे में पूछे जाने पर वडिंग ने दूसरी जगह से कहा, “पार्टी के प्रभारी महासचिव सभी से मिलते हैं। यह जरूरी नहीं है कि सभी बैठकें प्रदेश इकाई के अध्यक्ष की मौजूदगी में ही हों।”

जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या पंजाब कांग्रेस में जल्द ही एकता देखने को मिलेगी, तो वडिंग ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यह बैठक इसी बारे में है।” शुरू में हिचकिचाहट के बावजूद, चन्नी और उनके करीबी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बृहस्पतिवार को आखिरकार कई दिनों से चल रही अनिश्चितता को खत्म करने और बघेल से मिलकर उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं की “भावनाओं” से अवगत कराने का फैसला किया।

पंजाब में कांग्रेस के कई मौजूदा विधायक, कुछ सांसद, पूर्व सांसद एवं विधायक तथा विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के नेता सुबह राणा गुरजीत के आवास पर पहुंचे।

चन्नी खेमे के शक्ति प्रदर्शन का संकेत देते हुए पार्टी नेता बरिंदर ढिल्लों ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे एक ऐसे नेता का नाम बताइए, जो आज यहां नहीं है। पूरी कांग्रेस यहां मौजूद है।’’

पूर्व मंत्री गुरप्रीत कांगड़ ने बैठक से पहले कहा कि यह बैठक विशेष रूप से इस बात पर चर्चा करने के लिए हो रही है कि वडिंग का नेतृत्व नेताओं को स्वीकार है या नहीं।

बघेल पहले ही राज्य पार्टी नेतृत्व में किसी भी बदलाव की संभावना को खारिज कर चुके हैं।

भाषा

प्रशांत दिलीप

दिलीप


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