इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पत्रकार सत्यम वर्मा की याचिका पर केंद्र, राज्य से जवाब मांगा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पत्रकार सत्यम वर्मा की याचिका पर केंद्र, राज्य से जवाब मांगा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पत्रकार सत्यम वर्मा की याचिका पर केंद्र, राज्य से जवाब मांगा
Modified Date: September 17, 2026 / 12:10 am IST
Published Date: September 17, 2026 12:10 am IST

प्रयागराज, 16 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा की जिला मजिस्ट्रेट को बुधवार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

वर्मा ने नोएडा में अप्रैल, 2026 में कामगारों के विरोध प्रदर्शन में कथित भागीदारी के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत अपनी हिरासत को चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई सात अक्टूबर को निर्धारित की।

याचिका में हिरासत के आदेश और बाद के आदेशों को रद्द करने एवं वर्मा की तत्काल रिहाई के साथ ही कथित अवैध हिरासत के लिए मुआवजा दिए जाने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में मुख्य आधार यह बनाया गया है कि हिरासत का आदेश कथित तौर पर इस ‘‘तथ्यात्मक रूप से असंभव’’ धारणा पर आधारित था कि वर्मा 13 अप्रैल, 2026 को नोएडा में हुई हिंसा में शामिल थे।

याचिका में दावा किया गया है कि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के मुताबिक, वर्मा घटनास्थल से 500 किलोमीटर दूर लखनऊ में थे जहां उन्हें उसी दिन हसनगंज पुलिस द्वारा दोपहर सवा दो बजे कथित तौर पर हिरासत में लिया गया।

याचिका में इसे पुख्ता सबूत के तौर पर पेश किया गया और दलील दी गई कि ‘‘भौतिक रूप से असंभव और स्पष्ट रूप से गलत आधार’’ पर जारी रासुका हिरासत का आदेश रद्द किये जाने योग्य है।

याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि जांच अधिकारी ने जानबूझकर सीडीआर और हसनगंज पुलिस थाने के सीसीटीवी फुटेज को दबाया। साथ ही वर्मा 11 प्राथमिकियों में से किसी में भी नामजद नहीं थे।

याचिका के मुताबिक, हिरासत का आदेश मंगल नाम के सह आरोपी द्वारा पुलिस हिरासत में कथित रूप से दिए गए बयानों पर आधारित है। इस तरह के बयान कानून की दृष्टि में अस्वीकार्य हैं और इन्हें आधार नहीं बनाया जा सकता।

याचिका में आरोप लगाया गया कि रासुका का इस्तेमाल मजदूरों की स्वतः स्फूर्त और कानूनी मांग को कुचलने के लिए किया गया।

वर्मा ने सह-बंदी आकृति चौधरी से जुड़े इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश का भी हवाला दिया जिसमें अदालत ने उसी तारीख पर उसी अधिकारी द्वारा जारी किए गए एहतियातन हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया था।

इस आधार पर वर्मा ने दावा किया कि उसका मामला और भी मजबूत आधार पर टिका है और वह समानता के आधार पर हिरासत के आदेश को रद्द करने का अनुरोध कर रहे हैं।

भाषा सं राजेंद्र गोला

गोला


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