नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) अभिनेत्री कृतिका कामरा का कहना है कि कलाकार कभी भी किसी फैसले को लेने वाले एकमात्र निर्णायक नहीं होते। कामरा ने कहा कि और उन्हें खुशी है कि उनके किरदारों के चुनावों ने ऐसी छवि बनाई है कि लोग अब उन्हें प्रभावहीन भूमिकाओं के लिए नहीं चुनते।
उन्होंने कहा कि मैने हमेशा अपने सामने आने वाले हर अवसर में से बेहतर विकल्प चुनने की कोशिश की है।
कामरा ने बेहद लोकप्रिय सीरियल ‘द ग्रेट शम्सुद्दीन फैमिली’ में एक ऐसी परेशान बेटी की भूमिका के लिए खूब प्रशंसा बटोरी, जो एक ही दिन में समयसीमा के भीतर काम को पूरा करने के साथ-साथ पारिवारिक संकट से भी जूझ रही थी। अब वह फिल्म निर्माता नागराज मंजुले की फिल्म ‘द मटका किंग’ में विजय वर्मा के साथ एक अमीर पारसी विधवा की भूमिका निभा रही हैं।
कामरा और वर्मा दोनों ही पूर्णतः बाहरी पृष्ठभूमि वाले कलाकार हैं और उन्होंने बिना किसी पारिवारिक या फिल्मी समर्थन के अपने दम पर पहचान बनाई है।
कामरा ने कहा कि वह अपने करियर की प्रगति से खुश हैं, हालांकि वह चाहती हैं कि अधिकांश बार वह अपने मुताबिक फैसले ले सके।
कामरा ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में बताया, ‘ उन्होंने (विजय ने) हाल ही में कहा कि वह अपनी ‘फिल्मोग्राफी’ को सोच-समझकर आकार देने की कोशिश कर रहे हैं। मैं इससे खुद को जोड़ पाती हूं क्योंकि मैं भी ऐसा ही कर रही हूं। हम दोनों मानते हैं कि हर अनुभव का कुल योग अंत में सार्थक साबित होगा। और मेरे करियर में, कम से कम टेलीविजन के दिनों के बाद से, कभी कोई रातोंरात मिली सफलता या एक निर्णायक मोड़ नहीं रहा। छोटे-छोटे कदमों और कई भूमिकाओं ने मिलकर अब मेरी एक खास छवि बनाई है।’
उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मी कामरा ने अपने शुरुआती साल मध्य प्रदेश और दिल्ली में बिताए, फिर एक टीवी शो में काम मिलने के बाद मुंबई आ गईं।
उन्होंने ‘कितनी मोहब्बत है’ और उसके ‘सीक्वल’, और ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ से लोकप्रियता हासिल की।
कामरा ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने सामने आने वाले हर अवसर में से बेहतर विकल्प चुनने की कोशिश की है।
भाषा तान्या पवनेश
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