कांग्रेस पर कॉजपा का प्रदर्शन दबाने के आरोपों के बीच उद्धव ने विपक्ष में आपसी बातचीत की पैरवी की

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कांग्रेस पर कॉजपा का प्रदर्शन दबाने के आरोपों के बीच उद्धव ने विपक्ष में आपसी बातचीत की पैरवी की

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 04:38 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 04:38 PM IST

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कहा कि जिस तरह सरकार को विरोध कर रहे छात्रों से संवाद करना चाहिए, उसी तरह विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे पर आपस में बातचीत करनी चाहिए।

उनकी यह टिप्पणी आम आदमी पार्टी (आप) के उस आरोप के जवाब में आई है, जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस पार्टी भाजपा की ‘बी-टीम’ है और उसने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के आंदोलन को दबाने के लिए मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन किया।

इससे छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर विपक्ष के भीतर मतभेद का संकेत मिलता है।

ठाकरे ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हमें युवाओं के साथ खड़ा होना चाहिए। मैं युवाओं के साथ हूं, इसीलिए मैं अभिजीत (दीपके) से मिला। जिस तरह सरकार को युवाओं से संवाद करना चाहिए, उसी तरह विपक्ष को भी आपस में बातचीत करनी चाहिए।’’

ठाकरे मंगलवार शाम दिल्ली पहुंचकर कॉजपा संस्थापक से मिलने जंतर-मंतर गए थे।

संवाददाता सम्मेलन के कुछ घंटों बाद आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने यहां शिवसेना (उबाठा) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के आवास पर ठाकरे से मुलाकात की।

ठाकरे ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है और केंद्र पर आरोप लगाया कि एक महीने से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बावजूद सरकार ने उनसे बातचीत करने से इनकार कर दिया है।

ठाकरे ने कहा, ‘‘मैंने पहले दिन से ही इस विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है। युवा देश का भविष्य हैं। अगर आप उन्हें दबाने की कोशिश करेंगे, तो वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब आप उन्हें कॉकरोच कहते हैं, तो यह बर्दाश्त की सारी हदें पार कर जाता है। अगर देश में तानाशाही थोपी गई, तो युवा चुप नहीं बैठेंगे।’’

आंदोलन से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बातचीत लोकतंत्र की बुनियाद है।

उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं से बातचीत करने में क्या खराबी है? वे एक महीने से अधिक समय से विरोध कर रहे हैं। अगर सरकार ने उनसे बात की होती, तो यह मामला सुलझ गया होता।’’

सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लेह में भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक के पिता से खुद मिली थीं, जबकि संप्रग सरकार ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के समय बातचीत के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख को भेजा था।

ठाकरे ने कहा कि अगर सरकार पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाने के बावजूद उससे बातचीत के रास्ते खुले रख सकती है, तो उसे प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने मई में ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए गए एक साक्षात्कार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के नागरिक समाजों के बीच बातचीत की गुंजाइश हमेशा बनी रहनी चाहिए।

ठाकरे ने सोमवार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं और यहां तक कि कम उम्र की लड़कियों के साथ भी मारपीट की गई।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कम उम्र की लड़कियों (मुश्किल से नौ या 10 साल की) और कई महिलाओं को देखा… उनके साथ जैसा बर्ताव किया गया, मुझे नहीं लगता कि हिंदू संस्कृति महिलाओं के प्रति ऐसे व्यवहार की इजाजत देती है। एक लड़की के कपड़े फाड़ दिए गए। क्या यह हिंदू संस्कृति है? यह तो रावण संस्कृति है।’’

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश