नईदिल्ली: Amit shah Ordered to study and prepare SOP, पिछले कुछ दिनों में भारत के पड़ोसी देशों में हुए जनांदोलनों के कारण तख्तापलट हुआ। श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जो कि भारत के पड़ोसी देश हैं, पिछले दिनों हुए आंदोलनों से भड़की चिंगारी ने सत्ता को हिलाकर रख दिया। जिसके बाद सोशल मीडिया में तो कुछ लोग सीधा केंद्र सरकार को टारगेट करते हुए तंज कसना शुरू कर दिया, तो कुछ ने सीधा सीधा कह दिया कि आपको भी सावधान रहने की जरूरत है।
इसी बीच एक बड़ी खबर निकलकर सामने आयी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) को आदेश दिया है कि देश में आजादी के बाद खासकर 1974 के बाद से देश के अंदर जितने भी विरोध-प्रदर्शन और जनांदोलन हुए हैं, उनका अध्ययन कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि उन आंदोलनों के पीछे कौन लोग थे, आंदोलन के कारण क्या थे और उन्हें किसने फंडिंग की थी। इतना ही नहीं इसके अलावा उन आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शन का परिणाम क्या रहा? जाहिर है कि इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य भविष्य में होने वाले जनांदोलनों को रोकने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करना है।
एक बड़ी अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार केद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जुलाई के अंतिम सप्ताह में नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन- 2025’ में ये निर्देश दिए हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि BPR&D को उन विरोध प्रदर्शनों के कारणों, पैटर्न और परिणामों का विश्लेषण करने के लिए कहा गया है, विशेष रूप से उन जनांदोलनों में पर्दे के पीछे कौन लोग शामिल थे, इसका पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारी के अनुसार यह निर्देश भी दिया गया है कि भविष्य में निहित स्वार्थों की वजह से अगर कोई बड़ा विरोध-प्रदर्शन होता है तो उसे रोकने के लिए क्या मानक होने चाहिए, इसे भी इस अध्ययन परिणामों के आधार पर तैयार किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार अमित शाह के निर्देशों के बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले अधीन BPR&D एक टीम गठित करने की प्रक्रिया में है, जो राज्यों के पुलिस महकमों के साथ मिलकर उनके अपराध जाँच विभागों (CID) की रिपोर्टों समेत पुराने केस की फाइलों की स्टडी करेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने BPR&D को प्रवर्तन निदेशालय (ED), वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIUIND) और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) जैसी वित्तीय जाँच एजेंसियों को भी ऐसे आंदोलनों के “वित्तीय पहलुओं” की जाँच प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया है ।
इसके अलावा आतंकी फंडिंग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए, इन संस्थाओं को वित्तीय अनियमितताओं के विश्लेषण के माध्यम से अज्ञात आतंकी नेटवर्क, उनके संबंधों और इरादों की पहचान करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया विकसित करने को कहा गया है।
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि अमित शाह ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से पंजाब में खालिस्तानी उग्रवाद और सामान्य आपराधिक गतिविधियों से निपटने के लिए भी अलग-अलग SOP तैयार करने को कहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमित शाह ने BPR&D को विभिन्न धार्मिक जनसभाओं पर भी स्टडी करने के लिए राज्य पुलिस विभागों के साथ समन्वय करने को कहा है ताकि भगदड़ जैसी घटनाओं के कारणों को समझा जा सके और ऐसे आयोजनों की निगरानी और नियमन के लिए भी एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जा सके।
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