Former MLA Mhendra Shastri Passes Away: पूर्व विधायक का निधन.. रक्षाबंधन से पहले परिवार, प्रशंसकों पर टूटा दुखों का पहाड़, चपरासी से बने थे एमएलए

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मुंडावर के पूर्व विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेन्द्र शास्त्री का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे सहकारिता राजनीति के चाणक्य माने जाते थे।

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 12:43 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 12:45 PM IST

Former MLA Mhendra Shastri Passes Away || Image- Tika Ram Jully twitter

HIGHLIGHTS
  • महेन्द्र शास्त्री का 95 साल में निधन
  • 1985 में मुंडावर से विधायक बने
  • सहकारिता राजनीति के चाणक्य माने जाते थे

जयपुर: मुंडावर के पूर्व विधायक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेन्द्र शास्त्री का गुरुवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से अलवर जिले में शोक की लहर दौड़ गई। (Former MLA Mhendra Shastri Passes Away) नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया। शास्त्री को अलवर की सहकारिता राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता था। वे अपनी बेबाक बातों और स्पष्ट राजनीतिक टिप्पणियों के लिए भी जाने जाते थे।

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चपरासी से विधायक तक का सफर

महेन्द्र शास्त्री का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने दसवीं कक्षा पास करने के बाद चपरासी की नौकरी शुरू की। इसके बाद वे शिक्षक बने। आगे चलकर उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की और वकालत भी शुरू की। राजनीति में उनकी एंट्री वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुंभाराम आर्य के जरिए हुई। उनकी राजनीतिक समझ से प्रभावित होकर आर्य ने उन्हें अपना निजी सचिव बना लिया। यहीं से महेन्द्र शास्त्री के राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।

1985 में बने विधायक

महेन्द्र शास्त्री ने 1962, 1980, 1990 और 2003 में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1985 में लोकदल के टिकट पर मुंडावर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। (Former MLA Mhendra Shastri Passes Away) राजनीति के साथ वे सहकारिता क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। वे को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष से लेकर राजस्थान राज्य सहकारी संघ तक कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उनके योगदान के लिए उन्हें 2010 में सहकारिता रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कई बड़े नेताओं से रहे अच्छे संबंध

महेन्द्र शास्त्री के प्रदेश के कई बड़े नेताओं से अच्छे संबंध रहे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया, अशोक गहलोत और भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत शामिल थे। अलवर जिले में भी उनके कई वरिष्ठ नेताओं के साथ अच्छे राजनीतिक संबंध रहे। उनके परिवार के अनुसार, उनका पूरा सार्वजनिक जीवन जनहित, संगठन और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित रहा।

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लंबे समय से राजनीति से थे दूर

महेन्द्र शास्त्री पिछले एक दशक से ज्यादा समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। वे अलवर के मोती डूंगरी स्थित अपने घर पर रहकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। (Former MLA Mhendra Shastri Passes Away) हाल ही में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उनके सहयोगी रहे देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी उनका स्वास्थ्य जानने उनके घर पहुंचे थे। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कई अन्य वरिष्ठ नेता भी उनसे मिलने पहुंचे थे।

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Q1. महेन्द्र शास्त्री कौन थे?

महेन्द्र शास्त्री मुंडावर के पूर्व विधायक और राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता थे।

Q2. महेन्द्र शास्त्री कब विधायक बने थे?

उन्होंने 1985 में लोकदल के टिकट पर मुंडावर विधानसभा सीट से चुनाव जीता था।

Q3. महेन्द्र शास्त्री को किस क्षेत्र में पहचान मिली?

उन्हें अलवर की सहकारिता राजनीति में उनके योगदान और नेतृत्व के लिए पहचान मिली।