Amit Shah on Naxalism in Parliament : गरीबी नहीं, ये थी नक्सलवाद की असली जड़! लोकसभा में अमित शाह ने आंकड़ों से खोला बड़ा राज
Amit Shah ने लोकसभा में कहा कि गरीबी नहीं, बल्कि जंगल-पहाड़ और वैचारिक प्रभाव नक्सलवाद के फैलाव की बड़ी वजह रहे।
Amit Shah on Naxalism in Parliament / Image Source : SCREENGRAB
- Amit Shah ने लोकसभा में नक्सलवाद पर विस्तार से सरकार का पक्ष रखा।
- बस्तर और नक्सलबाड़ी की तुलना सहरसा और बलिया से करते हुए आंकड़े पेश किए।
- कहा कि जंगल-पहाड़ वाले भूगोल ने उग्रवाद को पनपने में मदद की।
नई दिल्ली : Amit Shah on Naxalism in Parliament लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखा। शाह ने उन धारणाओं को खारिज कर दिया जिनमें गरीबी को नक्सलवाद का जनक माना जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि असल में नक्सलवाद के कारण ही आदिवासी इलाकों में दशकों तक गरीबी बनी रही, न कि गरीबी के कारण नक्सलवाद फैला। शाह ने कहा- आदिवासी इलाकों में नक्सलवाद के कारण सालों तक गरीबी रहीआदिवासी इलाकों में गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला बल्कि नक्सलवाद के कारण सालों तक गरीबी रही। नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से जुड़ी नहीं हैं। ये वैचारिक हैं।
Lok Sabha News सहरसा और बलिया में उग्रवाद नहीं पनपा
अमित शाह ने अपने संबोधन में नक्सलवाद की जड़ों को वैचारिक बताया और चार अलग-अलग क्षेत्रों नक्सलवाड़ी, बस्तर, सहरसा, और बलियाके तुलनात्मक आंकड़े पेश किए Lok Sabha News
शाह ने बताया कि नक्सलवाड़ी 35%, बस्तर 23%, सहरसा 33%, और बलिया 31% में साक्षरता दर लगभग समान थी। वहीं प्रति व्यक्ति आय भी कमोबेश एक जैसी थी बस्तर 190 से लेकर नक्सलवाड़ी 500 तक। इसके बावजूद सहरसा और बलिया में उग्रवाद नहीं पनपा।
क्यों नहीं पनपा उग्रवाद?
गृह मंत्री ने तर्क दिया कि सहरसा और बलिया में नक्सलवाद इसलिए नहीं पनपा क्योंकि वहां का भूगोल उग्रवादियों के अनुकूल नहीं था। इसके विपरीत, बस्तर और नक्सलवाड़ी के जंगल, पहाड़ और नदी-नाले हथियारबंद मूवमेंट और छिपने के लिए अनुकूल थे, जिसका फायदा उठाकर आदिवासियों को जबरदस्ती विचारधारा से जोड़ा गया।
नरेंद्र मोदी सरकार के शासन में अब आदिवासी क्षेत्रों में विकास घर-घर पहुंच रहा है
गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के शासन में अब आदिवासी क्षेत्रों में विकास घर-घर पहुंच रहा है। उन्होंने साफ किया कि नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए विकास के साथ-साथ इस हिंसक विचारधारा को खत्म करना अनिवार्य है, जिसने सालों तक आदिवासी समाज को पिछड़ा बनाए रखा।
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