पणजी, 29 सितंबर (भाषा) गोवा के वैज्ञानिकों का कहना है कि जमे हुए अंटार्कटिक महासागर में खुले पानी का एक बहुत बड़ा हिस्सा पिछले 250 साल में कई बार बना है, जिससे पता चलता है कि यह कोई दुर्लभ या एक बार होने वाली घटना नहीं है।
गोवा स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के शोधकर्ताओं ने 122 मीटर लंबे बर्फ के कोर पर्यावरण संबंधी डेटा का विश्लेषण करके ‘मौड राइज पॉलिन्या’ (एमआरपी) के खुलने की 25 संभावित घटनाओं की पहचान की। एमआरपी समुद्री बर्फ से घिरे खुले पानी का एक बड़ा क्षेत्र है।
हाल में शोध पत्रिका ‘‘द क्रायोस्फीयर’’ में प्रकाशित एक अध्ययन में, पूर्वी अंटार्कटिका के तटीय ड्रोनिंग मौड लैंड से लिए गए एक आइस कोर के विश्लेषण का इस्तेमाल करके 1774 से 2016 तक एमआरपी—जिसे वेडेल पॉलिन्या के नाम से भी जाना जाता है—की स्थिति का पता लगाया गया।
यह अध्ययन राहुल डे, चावरुकोणम एम. लालूराज, केनिची मात्सुओका, आशीष पाईगुंइकर, भीकाजी एल. रेडकर और थंबन मेलोथ ने किया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अध्ययन में पॉलिन्या की गतिविधियों के स्पष्ट समूहों की पहचान की गई है। उनका कहना है कि ये समूह वायुमंडलीय परिसंचरण के विशेष पैटर्न और समुद्र संबंधी उन पूर्व स्थितियों के मेल से जुड़े हो सकते हैं, जो इस घटना के निर्माण के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करते हैं।
अध्ययन के अनुसार, पूर्वी वेडेल सागर में मौड राइज चोटी के ऊपर स्थित मौड राइज पॉलिन्या, दक्षिणी महासागर में खुले समुद्र में बनने वाले सबसे महत्वपूर्ण पॉलिन्या क्षेत्रों में से एक है। 1974-1976 के दौरान इसका विस्तार अपने चरम पर 3,00,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया था और इसके कारण 3,000 मीटर से अधिक की गहराई तक समुद्र में तेज हलचल शुरू हुई थी।
वर्ष 2016 और 2017 की सर्दियों में यह छोटे पैमाने पर फिर से दिखाई दिया, जब इसका आकार 40,000 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो गया, जिससे इस घटना में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ गई।
शोधकर्ताओं ने कहा कि उपग्रह के दौर से पहले इस घटना को समझना मुश्किल रहा है और इस कमी को दूर करने के लिए टीम ने तटीय ड्रॉनिंग मौड लैंड में जुप्रानेन आइस राइज पर ड्रिल किए गए 122-मीटर लंबे आइस कोर का विश्लेषण किया।
अध्ययन में 18वीं सदी के उत्तरार्ध और 19वीं सदी में पॉलिन्या गतिविधियों के समूह, 20वीं सदी के शुरुआती दौर में उल्लेखनीय घटनाओं और लगभग 1920 से 1950 के बीच अपेक्षाकृत कम गतिविधि वाले दौर का उल्लेख किया गया है। इसमें 1980 के बाद के कई वर्षों में मध्यम स्तर की पॉलिन्या गतिविधियों की भी पहचान की गई।
भाषा आशीष माधव
माधव