गोवा में महिलाओं में फेफड़े के कैंसर के बढ़ते मामलों पर तंबाकू रोधी संगठन ने चिंता जताई

गोवा में महिलाओं में फेफड़े के कैंसर के बढ़ते मामलों पर तंबाकू रोधी संगठन ने चिंता जताई

गोवा में महिलाओं में फेफड़े के कैंसर के बढ़ते मामलों पर तंबाकू रोधी संगठन ने चिंता जताई
Modified Date: September 9, 2026 / 12:13 pm IST
Published Date: September 9, 2026 12:13 pm IST

पणजी, नौ सितंबर (भाषा) गोवा में फेफड़े के कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में इसके संभावित कारणों की तत्काल जांच की जरूरत बताते हुए एक संगठन ने कहा कि इन कारणों में परोक्ष रूप से धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आना, पर्यावरण प्रदूषण और कार्यस्थल पर हानिकारक चीजों के संपर्क में आना शामिल हो सकता है।

‘नेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर टोबेको इरेडिकेशन’ (एनओटीई) इंडिया ने मंगलवार को दावा किया कि गोवा में हर साल फेफड़े के कैंसर के 120 से 150 नये मामले सामने आते हैं।

संगठन के अनुसार, करीब एक दशक पहले फेफड़े के कैंसर के कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर करीब 40 प्रतिशत हो गई है।

संगठन के अध्यक्ष डॉ. शेखर सालकर ने एक बयान में कहा कि यह महामारी विज्ञान के लिहाज से एक महत्वपूर्ण बदलाव है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि तंबाकू का सेवन फेफड़े के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक बना हुआ है लेकिन गोवा में इससे पीड़ित महिलाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बात की सुनियोजित जांच जरूरी है कि संख्या में यह बदलाव क्यों आ रहा है।

संगठन ने गोवा सरकार, मेडिकल संस्थानों और अकादमी अनुसंधान संगठनों से आग्रह किया कि वे गोवा में फेफड़ों के कैंसर के बदलते स्वरूप का व्यापक अध्ययन करें।

इस संगठन ने ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि भारत में दूसरे लोगों के धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आने से होने वाली मौतों की संख्या 1990 में करीब 2.17 लाख थी, जो 2023 में बढ़कर अनुमानित 3.26 लाख हो गई।

इसके अनुसार, अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया कि दूसरे के धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आने से फेफड़े के कैंसर, ‘क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज’ ( पुरानी सूजन संबंधी फेफड़ों की बीमारी), निचले श्वसन तंत्र के संक्रमण, हृदय रोग, स्तन कैंसर, अस्थमा और लकवा समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

संगठन ने धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों को तंबाकू के धुएं के अनैच्छिक संपर्क से बचाने की जरूरत पर भी जोर दिया और धूम्रपान-मुक्त कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग की।

सालकर ने कहा, ‘‘दूसरे लोगों के धूम्रपान का धुआं दिखाई नहीं देता लेकिन इसके दुष्परिणाम वास्तविक होते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि धूम्रपान नहीं करने वाली महिलाओं और बच्चों को किसी अन्य व्यक्ति के तंबाकू सेवन के कारण स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणाम झेलने पड़ें।’’

भाषा प्रचेता वैभव

वैभव


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